नयी दिल्ली, नौ सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने विमान नियमों का उल्लंघन करने के कथित अपराध के लिए एअर इंडिया के पायलट अरविंद कठपालिया के खिलाफ एक प्राथमिकी रद्द करते हुए कहा कि उन पर लगाए आरोप उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
कठपालिया पर नशे का पता लगाने के लिए ‘ब्रेथ एनालाइजर’ जांच नहीं कराने और धोखाधड़ी के भी आरोप थे।
इस जांच के तहत यह पता लगाया जाता है कि व्यक्ति द्वारा सांस के साथ छोड़ी गई हवा में कितनी मात्रा में अल्कोहल है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता पर एक ही अपराध के लिए दो बार मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, जबकि उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई में ‘क्लिन चिट’ दे दी गयी है।
न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने कहा, ‘‘इस अदालत की राय में उपरोक्त परिस्थितियों के तहत प्राथमिकी बरकरार रखने से याचिकाकर्ता को एक ही अपराध के लिए दो बार मुकदमे का सामना करना पड़ेगा।’’
उच्च न्यायालय का आदेश कठपालिया की उस याचिका पर आया है, जिसमें उन्होंने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत सबूत मिटाने, आपराधिक साजिश, फर्जीवाड़ा और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के कथित अपराध और विमान कानून के प्रावधानों के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया था।
कठपालिया को उड़ान भरने से पूर्व अल्कोहल संबंधी जांच में पाक-साफ नहीं पाये जाने के बाद नवंबर 2018 में एअर इंडिया के संचालन निदेशक के पद से हटा दिया गया था। सरकार ने इसके लिए ‘‘अपराध की गंभीर प्रकृति’’ का हवाला दिया था।
कठपालिया की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि एअर इंडिया के अनुशासनात्मक प्राधिकरण ने याचिकाकर्ता के खिलाफ फरवरी 2019 में आरोपपत्र दाखिल किया, जिसमें फर्जीवाड़ा और कदाचार के आरोप लगाए गए। कठपालिया ने भी इस पर जवाब दाखिल किया था।
उन्होंने कहा कि एअर इंडिया के चेयरमैन ने फरवरी 2020 को दिए आदेश में याचिकाकर्ता के खिलाफ जालसाजी के आरोपों को निराधार पाया और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक मामला बंद कर दिया।
सिंह ने कहा कि कठपालिया के खिलाफ प्राथमिकी बरकरार नहीं रह सकती और उन्होंने अदालत से इसे रद्द करने का अनुरोध किया।
अभियोजन पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि लाभ लेने के इरादे से कानून की उचित प्रक्रिया की अवहेलना करते हुए याचिकाकर्ता ने एक झूठी प्रविष्टि दर्ज की, जबकि उनके पास बेंगलुरु से लौटने पर ‘ब्रेथ एनालाइजर’ जांच कराने का पर्याप्त मौका था, लेकिन उन्होंने प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि जब एअर इंडिया ने ही संबंधित रिकॉर्ड खंगालने के बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई बंद कर दी है तो उसी अपराध में उनके खिलाफ प्राथमिकी को जारी रखने का कोई मतलब नहीं है।
पुलिस के अनुसार, कठपालिया ने 19 जनवरी 2017 को उड़ान से पहले अल्कोहल के सेवन की अनिवार्य जांच कराए बगैर नयी दिल्ली से बेंगलुरु तक विमान उड़ाया था। उन्होंने बेंगलुरु में भी यह जांच कराने से इनकार कर दिया था।
बाद में नयी दिल्ली पहुंचने पर उन्होंने कथित तौर पर जांच पंजी में झूठी प्रविष्टि दर्ज की थी।
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