नयी दिल्ली, एक फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में सभी थानों में ‘पैरा-लीगल’ स्वयंसेवकों की नियुक्ति के लिए दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएसएलएसए) की योजना को लागू करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने सभी हितधारकों को डीएसएलएसए योजना के कार्यान्वयन के विस्तार के उपायों पर विचार करने का निर्देश दिया।
पीठ ने देश भर में इस योजना को लागू करने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों पर संज्ञान लिया जिसमें कहा गया था कि डीएसएलएसए की पहले को आदर्श योजना के तौर पर लिया जाए।
इसके तहत तैनात स्वयंसेवकों का उद्देश्य लापता बच्चों और नाबालिगों के खिलाफ अपराधों के मामलों में लोगों की मदद करना है।
इस योजना को राष्ट्रीय राजधानी में 50 थानों में प्रायोगिक आधार पर लागू किया गया था।
दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और डीएसएलएसए ने मंगलवार को उच्च न्यायालय को आश्वासन दिया कि शीर्ष अदालत के निर्देशों के चलते प्रायोगिक परियोजना को नियमित योजना के रूप में लागू किया जाएगा।
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को सूचीबद्ध की है।
नोमान संतोष
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