जरुरी जानकारी | बौद्धिक संपदा अधिकार संबंधी मामलों से निपटने के लिये दिल्ली उच्च न्यायालय ने आईपी डिवीजन बनाया

नयी दिल्ली, छह जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) से जुड़े तमाम मामलों से निपटने के लिये एक बाद्धिक संपदा प्रभाग (आईपीडी) बनाया है।

न्यायाधिकरण सुधारों (सेवाओं की शर्तों और तर्कसंगतता) अध्यादेश 2021 ने आईपीआर के परिचालन से जुड़े विभिन्न कानूनों के तहत बने बोर्ड और अपीलीय न्यायाधिकरणों को समाप्त कर दिया।

आईपीडी बनाने का फैसला दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश डी. एन. पटेल की अध्यक्षता में बनी समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। इस समिति में न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और संजीव नरुला भी शामिल थे। समिति ने आईपीआर और गैर- आईपीआर विषय दोनों से जुड़े कानूनों के बारे में अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

उच्च न्यायालय ने एक वक्तव्य में कहा है मुख्य न्यायधीश द्वारा समय समय पर आईपीडी पीठ को अधिसूचित किया जाता रहेगा। वहीं इस तरह के मामलों को देखने के लिये विशिष्ट आईपीडी पीठ का भी गठन किया जाता रहेगा।

बयान में कहा गया है कि विभिन्न बोर्डों, न्यायाधिकरण के तहत लंबित मामले और नये मामलों को देखने का अधिकार अब उच्च न्यायालयों के पास होगा।

न्यायाधिकरण सुधारों (सेवाओं की शर्तों और तर्कसंगतता) अध्यादेश 2021 और इसके प्रभाव में आने से आईपीआर के परिचालन से जुड़े विभिन्न कानूनों के तहत बने बोर्ड और अपीलीय न्यायाधिकरणों को समाप्त कर दिया गया है। इसी तथ्य को सामने रखते हुये दो सदस्यी समिति और आईपीडी के गठन का फैसला लिया गया।

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