देश की खबरें | झुग्गी बस्तियों को हटाने के आदेश को लेकर पुनर्विचार याचिका दायर करेगी दिल्ली कांग्रेस
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, चार सितंबर राष्ट्रीय राजधानी में रेल पटरियों के किनारे बनीं हजारों झुग्गी बस्तियों को हटाने से जुड़े उच्चतम न्यायालय के आदेश की पृष्ठभूमि में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (डीपीसीसी) के अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी इस मामले पर शीर्ष अदालत में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी।

कुमार ने एक बयान में कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय के इस आदेश से 10 लाख से अधिक लोग बेघर हो जाएंगे, जबकि कोरोना संकट के कारण गरीब लोग पहले से ही मुसीबत का सामना कर रहे हैं।’’

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उन्होंने आरोप लगाया कि इस स्थिति से भाजपा और आम आदमी पार्टी जिम्मेदार हैं।

डीपीसीसी अध्यक्ष ने कहा, ‘‘दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार और भाजपा शासित नगर निगम इन लोगों को इतने वर्षों में दूसरी जगहों पर बसाने में विफल रही है।’’

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उन्होंने कहा कि शीला दीक्षित के मुख्यमंत्री रहते दिल्ली में 64,184 फ्लैट का निर्माण आरंभ हुआ था, लेकिन आप सरकार इनमें से सिर्फ 1931 फ्लैटों का आवंटन कर पाई।

उधर, माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदा करात इसी विषय पर रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर आग्रह किया कि इन झुग्गी बस्तियों में रहने वालों को सिर्फ हटाया नहीं जाए, बल्कि इनका पुनर्वास भी किया जाए।

उन्होंने कहा कि रेल मंत्री के पास यह अधिकार है कि वह इन लोगों का पुनर्वास सुनिश्चित करने का आदेश दे।

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में 140 किलोमीटर तक रेल पटरियों के किनारे बनीं 48,000 झुग्गी बस्तियों को तीन माह के भीतर हटाने का निर्देश दिया है और कहा कि इस कदम के क्रियान्वयन में किसी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

इसने कहा कि झुग्गी-झोपड़ियों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।

न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की तीन सदस्यीय पीठ ने इलाके में अतिक्रमण हटाने के संबंध में किसी भी अदालत को किसी तरह की रोक लगाने से भी रोका है और कहा है कि रेल पटरियों के पास अतिक्रमण के संबंध में अगर कोई अंतरिम आदेश पारित किया जाता है तो वह प्रभावी नहीं होगा।

हक

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