एक सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि नेता इस फैसले पर बहस करने और समाधान तलाशने के लिए समय ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रमुख अधिकारी माइकल ने कहा, '' इस बारे में चर्चा जारी है। ऐसी मुश्किल परिस्थिति में एक नया रास्ता तलाशने और बातचीत के लिए थोडा और समय लिया जाना बेहतर होगा।''
संवैधानिक अदालत ने 22 अक्टूबर को फैसला दिया था कि जन्मजात दोषों वाले भ्रूण का गर्भपात संविधान का उल्लंघन है, जिसके बाद अदालत ने गर्भपात संबंधी नियमों को और सख्त किए जाने का फैसला दिया था जोकि यूरोप के अन्य देशों के मुकाबले पहले ही काफी सख्त हैं।
ऐसे में पोलैंड के कानून के मुताबिक, केवल ऐसे मामलों में ही गर्भपात की अनुमति होगी, जब या तो महिला की जान को खतरा हो अथवा महिला अपराध का शिकार होने के कारण गर्भवती हुई हो।
अदालती फैसले को सोमवार को प्रकाशित किया जाना था लेकिन इसके प्रकाशित नहीं होने के चलते फिलहाल इसका कानूनी महत्व नहीं है।
गर्भपात नियमों को सख्त किए जाने का फैसला आने के बाद से ही पोलैंड में रोजाना सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें हजारों लोग भाग ले रहे हैं।
पोलैंड के प्रधानमंत्री मैतुसज मोरवीकी ने मुद्दे का समाधान निकालने के लिए प्रदर्शनकारियों और विपक्षी सांसदों से बातचीत की अपील की है।
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