अहमदाबाद, दो मई गुजरात उच्च न्यायालय ने ‘मोदी उपनाम’ टिप्पणी से संबंधित आपराधिक मानहानि मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मंगलवार को अंतरिम राहत प्रदान करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि इस चरण में उन्हें संरक्षण नहीं प्रदान किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी कहा कि वह ग्रीष्मावकाश के बाद अंतिम आदेश सुनाएगा।
गांधी (52) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद ‘तत्कालिकता’ का हवाला देते हुए अदालत से अंतरिम या अंतिम आदेश जारी करने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा कि आपराधिक मानहानि मामले में शायद ही कोई ऐसा उदाहरण होगा, जिसमें तीन से छह माह से अधिक की जेल की सजा हुई हो और उनके मुवक्किल से पहली बार यह गलती हुई है।
शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी के वकील ने गांधी को अंतरिम राहत के लिए सिंघवी के अनुरोध का विरोध किया और कहा कि अगर अयोग्य सांसद अपने मानहानि वाले बयानों के लिए माफी नहीं मांग सकते हैं, तो उन्हें दोषसिद्धि पर रोक के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा भी नहीं खटखटाना चाहिए।
दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति हेमंत प्रच्छक ने कहा कि ‘मोदी उपनाम’ संबंधी टिप्पणी को लेकर आपराधिक मानहानि मामले के इस चरण में अंतरिम संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
न्यायमूर्ति प्रच्छक ने कहा कि वह रिकॉर्ड और कार्यवाही की अधिकृत रपट पढ़ने के बाद ही अंतिम आदेश सुनाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने ग्रीष्मावकाश के बाद फैसला सुनाने की बात कही। गुजरात उच्च न्यायालय में आठ मई से तीन जून तक ग्रीष्मावकाश है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गुजरात के विधायक एवं मामले के मूल शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी की ओर से पेश अधिवक्ता निरुपम नानावती ने गांधी को अंतरिम राहत प्रदान करने के सिंघवी के अनुरोध का पुरजोर विरोध किया।
पूर्णेश मोदी के वकील ने कहा कि 40 साल तक देश पर राज करने वाले राष्ट्रीय राजनीतिक दल का नेता होने के नाते गांधी को ‘सीख मिलनी’ ही चाहिए कि अपने राजनीतिक विद्रोहियों के खिलाफ अभद्र के इस्तेमाल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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