लखनऊ, 16 जून उत्तर प्रदेश मंत्रिमण्डल द्वारा मंगलवार को गठन के चंद घंटों बाद ही 'उत्तर प्रदेश कामगार और श्रमिक (सेवायोजन एवं रोजगार) आयोग' की पहली बैठक हुई। इस बैठक में कामगारों और श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के बारे में सुझाव देने के लिये वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की अध्यक्षता में एक समिति गठित किए जाने का निर्णय लिया गया।
राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कहा कि उत्तर प्रदेश कामगार और श्रमिक (सेवायोजन एवं रोजगार) आयोग का गठन कामगारों/श्रमिकों के लिए विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवसर पैदा करना है, जिससे कामगारों/श्रमिकों को उनकी योग्यता व क्षमता के अनुरूप रोजगार दिया जा सके। उन्होंने कहा कि आयोग की बैठक हर महीने बुलायी जाएगी।
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बैठक में कामगारों और श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के बारे में सुझाव देने के लिये वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की अध्यक्षता में एक समिति गठित किए जाने का निर्णय लिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के कारण देश के विभिन्न राज्यों से प्रदेश में बड़ी संख्या में कामगार/श्रमिक आए हैं, जिनमें से 34 लाख कामगारों/श्रमिकों की स्किल मैपिंग की गई है और उन्हें उनकी क्षमता व योग्यता के अनुसार निरन्तर रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
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इसके पूर्व, मंत्रिमण्डल ने श्रमिकों की आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा और मजबूत करने के उद्देश्य से 'उत्तर प्रदेश कामगार और श्रमिक (सेवायोजन एवं रोजगार) आयोग' के गठन का प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। आयोग का मकसद निजी और गैरसरकारी क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर श्रमिकों और कामगारों को उनके हुनर के अनुसार अधिकाधिक रोजगार मुहैया कराना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है ।
आयोग की पहली बैठक में योगी ने कहा कि आयोग के तहत एकीकृत पोर्टल का भी गठन किया गया है, जिसमें प्रदेश के प्रवासी व निवासी कामगारों/श्रमिकों की क्षमता और कौशल का सम्पूर्ण डेटा दर्ज किया जाएगा। इस व्यवस्था की लगातार माॅनीटरिंग एवं इसे अद्यतन करते हुए फील्ड स्तर पर डाटा का संग्रहण व इसके समुचित क्रियान्वयन की व्यवस्था बनायी जाएगी। इसके लिए जनपदों में स्थित सेवायोजन कार्यालयों का उपयोग सुनिश्चित होगा।
उन्होंने कहा कि विभिन्न औद्योगिक इकाइयों, सेवा क्षेत्र, निर्माण प्रतिष्ठानों एवं अन्य राज्यों, जहां पर श्रमिकों का योजन हो रहा है, वहां श्रमिकों के पक्ष में न्यूनतम एवं आधारभूत सुविधाएं जैसे-आवास, सामाजिक सुरक्षा, बीमा सम्बन्धी उपादानों आदि की व्यवस्था भी आयोग द्वारा सुनिश्चित की जाएगी।
सलीम
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