नयी दिल्ली, एक अगस्त पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने उच्चतम न्यायालय को बताया है कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में पांच वयस्क चीतों और तीन शावकों की मौत परेशान करने वाली है, लेकिन ‘‘अत्यधिक चिंताजनक’’ नहीं है और एहतियात के तौर पर जीवित चीतों को पकड़कर उनकी चिकित्सीय जांच की जा रही है।
‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कुल 20 रेडियो-कॉलर चीतों को मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में लाया गया था और बाद में नामीबियाई चीता ‘ज्वाला’ ने चार शावकों का जन्म दिया। इन 24 चीतों में से तीन शावकों समेत आठ की मौत हो चुकी है।
कुछ चीतों में रेडियो कॉलर के कारण संक्रमण होने की सूचना मिली थी।
पर्यावरण मंत्रालय और एनटीसीए की ओर से दायर संयुक्त हलफनामे में कहा गया है कि मृत्यु की प्रारंभिक रिपोर्ट में ‘‘प्राकृतिक कारणों’’ से मौत के संकेत मिले हैं और किसी भी चीते की मौत अवैध शिकार, जहर के सेवन, सड़क पर हमला, बिजली के झटके जैसे अप्राकृतिक कारणों से नहीं हुई है।
हलफनामे में कहा गया है, ‘‘एनटीसीए के पास आज यह विश्वास करने का कोई कारण नहीं है कि कूनो साइट पर किसी अप्राकृतिक कारणों के कारण चीतों की मौत हुईं।’’
हलफनामे में कहा गया है कि सामान्य वैज्ञानिक जानकारी के मुताबिक पारिस्थितिकी तंत्र का एक अभिन्न अंग होने के नाते सामान्य तौर पर चीतों की जीवित रहने की दर वयस्कों में बहुत कम 50 प्रतिशत होती है, यहां तक कि पहले से मौजूद चीतों की आबादी में भी यह दर अधिक होती है।
हलफनामे के अनुसार, ‘‘अन्य जगह से लाए गए चीतों के मामले में इनके जीवित रहने की दर और भी कम होती है। शावकों में जीवित रहने की संभावना लगभग 10 प्रतिशत हो सकती है। इस तरह देखें तो मृत्यु दर (केएनपी में) चिंताजनक है और इसके निवारण और सुधार की आवश्यकता है, लेकिन यह अनुचित रूप से चिंताजनक नहीं है।’’
दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाए गए तीन शावकों सहित प्रत्येक चीते की मौत का विवरण देते हुए एनटीसीए ने कहा कि ‘भारत में चीतों को बसाने के लिए कार्य योजना’ नामक चीतों को बसाने के कार्यक्रम के अनुसार कार्यान्वित किया जा रहा है।
एनटीसीए ने कहा कि स्थानांतरित किए गए 20 वयस्क चीतों में से वर्तमान में 15 वयस्क चीते और एक भारत में जन्मा शावक जीवित है।
संयुक्त हलफनामे में पर्यावरण मंत्रालय और एनटीसीए ने उच्चतम न्यायालय को बताया है कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अलावा उन्होंने मध्यप्रदेश और राजस्थान में चीतों को बसाने के लिए संभावित अन्य स्थलों की पहचान की है।
इनमें मध्यप्रदेश में गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य और नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य और राजस्थान में शाहगढ़ बुलगे, भैंसरोड़गढ़ वन्यजीव अभयारण्य और मुकुंदरा हिल्स बाघ अभयारण्य शामिल है।
उन्होंने कहा कि मुकुंदरा हिल्स बाघ अभयारण्य वर्तमान में चीतों को रखने के लिए उपयुक्त नहीं है।
शीर्ष अदालत ने 20 जुलाई को कहा था कि केएनपी में एक साल से भी कम समय में आठ चीतों की मौत ‘‘अच्छी तस्वीर’’ पेश नहीं करती है।
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