नयी दिल्ली, 21 सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में सीवर के भीतर जहरीली गैस के कारण दम घुटने से दो लोगों की हुई मौत के मामले में बुधवार को दिल्ली पुलिस, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) से जवाब तलब किया।
मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ 11 सितंबर की खबर पर स्वत: संज्ञान लेते हुए शुरू की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
उल्लेखनीय है कि नौ सितंबर को दिल्ली के मुंडका इलाके में सीवर में घुसे एक सफाई कर्मी और एक सुरक्षा गार्ड की जहरीली गैस की वजह से मौत हो गई थी।
पुलिस ने बताया कि सफाई कर्मी सीवर को साफ करने गया था और जहरीली गैस की वजह से बेहोश हो गया था, जिसे बचाने सुरक्षा गार्ड भी सीवर में उतरा और वह भी बेहोश हो गया।
उन्होंने बताया कि दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सुनवाई के दौरान दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के वकील ने अदालत को बताया कि जिस क्षेत्र में घटना हुई है, वह डीडीए के अंतर्गत आता है और यहां तक कि मृत सफाईकर्मी भी डीडीए का कर्मचारी था।
डीजेबी के वकील ने कहा कि मृतक के वैध उत्तराधिकारी को मुआवजा देने के लिए वह जिम्मेदार नहीं है और इसके लिए उचित प्राधिकार डीडीए है।
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के वकील ने भी इसी तरह का तर्क दिया।
अदालत की मदद के लिए नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने कहा कि इस मामले में दिल्ली पुलिस और एनसीएसके को भी पक्षकार बनाया जाना चाहिए।
इसके बाद पीठ ने डीडीए, दिल्ली पुलिस और एनसीएसके को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 27 सितंबर को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
उल्लेखनीय है कि अदालत ने 12 सितंबर को दो व्यक्तियों की मौत पर स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले में जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया था।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY