देश की खबरें | अहमदाबाद फ्लाईओवर को नुकसान: न्यायालय का निजी कंपनी के निदेशक को अग्रिम जमानत देने से इनकार

नयी दिल्ली, 25 मई उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को एक निजी कंपनी के निदेशकों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया, जिन्हें अहमदाबाद में एक फ्लाईओवर के निर्माण के संबंध में दर्ज मामले में आरोपी बनाया गया है।

घटिया सामग्री के कथित उपयोग के कारण पुल को हुए नुकसान के मद्देनजर उसे सार्वजनिक इस्तेमाल के लिये बंद कर दिया गया है।

शीर्ष अदालत हटकेश्वर में एक बस टर्मिनल के पास फ्लाईओवर का निर्माण करने वाली कंपनी के चार निदेशकों द्वारा गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उच्च न्यायालय द्वारा उनकी अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी गई थी।

न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की अवकाशकालीन पीठ ने कहा, “यह अग्रिम जमानत लायक मामला नहीं है। चार साल के अंदर आपका पुल ढह जाएगा। माफ करें।”

इस मामले में अप्रैल 2023 में 406 (आपराधिक विश्वासघात के लिए सजा) और 420 (धोखाधड़ी) सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दंडनीय कथित अपराधों के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, कंपनी ने फ्लाईओवर के निर्माण के लिए निविदा प्राप्त की थी और कथित तौर पर घटिया गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल किया था जिससे इसे गंभीर नुकसान पहुंचा था।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि फ्लाईओवर को 2017 में उपयोग के लिए चालू किया गया था और चार-पांच वर्षों की अवधि के भीतर ही नुकसान के कारण इसे जनता के लिए बंद करना जरूरी हो गया।

इन निदेशकों ने उच्च न्यायालय के समक्ष दलील दी थी कि फ्लाईओवर का डिजाइन ‘मल्टी एक्सल’ उच्च भार वाहनों के योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि लगभग तीन साल तक ऐसे वाहनों के इस्तेमाल से नुकसान हुआ है।

शीर्ष अदालत के समक्ष बृहस्पतिवार को जिरह के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि पुल नवंबर 2017 में बनकर तैयार हुआ था। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने पुल पर बहुत भारी यातायात की अनुमति दी और मल्टी एक्सल भारी वाहनों के चलने के कारण फ्लाईओवर का ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया।

रोहतगी ने कहा, “मैं (फर्म के निदेशक) अग्रिम जमानत के लिए अनुरोध कर रहा हूं। कोई जान नहीं गई है, कुछ नहीं हुआ है। मेरी कार्य दायित्व अवधि भी समाप्त हो गई है। अगर वे चाहें तो मैं अब भी इसे ठीक करने को तैयार हूं, इसमें कोई समस्या नहीं है। मेरी ओर से कोई कमी नहीं है।”

उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा कि वह अग्रिम जमानत देने की इच्छुक नहीं है।

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