नयी दिल्ली, 29 अगस्त सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) ने मंगलवार को कहा कि बारिश में किसी भी देरी से मध्य प्रदेश सहित सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में सोयाबीन फसल की उत्पादकता प्रभावित होगी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खरीफ (ग्रीष्मकालीन बुवाई) सत्र में उगाए जाने वाले सोयाबीन का उत्पादन फसल वर्ष 2022-23 (जुलाई-जून) में रिकॉर्ड 149.76 लाख टन रहा, जो इससे पिछले वर्ष 129.87 लाख टन था।
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चालू खरीफ सत्र में 25 अगस्त तक सोयाबीन की बुवाई 124.71 लाख हेक्टेयर से अधिक में की गई है, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह रकबा 123.60 लाख हेक्टेयर था।
सोपा ने बयान में कहा, ‘‘अगस्त में बारिश में अभूतपूर्व कमी हुई है और फसल अभी तक रुकी हुई है, ऐसे में तुरंत बारिश की जरूरत है। बारिश में किसी भी तरह की देरी पूरे देश में सोयाबीन की फसल के लिए हानिकारक होगी।’’
एसोसिएशन ने 20 अगस्त से 28 अगस्त के बीच मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में सोयाबीन की फसल का व्यापक फसल स्वास्थ्य निगरानी सर्वेक्षण किया है।
सोपा ने कहा, ‘‘उपज के नुकसान की सीमा बारिश के पुन: आरंभ होने पर निर्भर करेगी और आज इसके बारे में भविष्यवाणी करना जल्दबाजी होगी। सब कुछ इस पर निर्भर करेगा कि अगले 45 दिन में मानसून कैसा रहता है।’’
सर्वेक्षण के निष्कर्षों के अनुसार, मध्य प्रदेश में सोयाबीन की फसल 45 से 60 दिन पुरानी है और फली बनने से लेकर फली भरने की अवस्था में है।
सोपा ने कहा, ‘‘जल्दी पकने वाली किस्म की बोई गई फसल दाना भरने की अवस्था में है। आज तक कुल मिलाकर फसल की स्थिति सामान्य है और इस पखवाड़े के दौरान हुई बारिश से फसल को मदद मिली है। कीड़े और खरपतवार अच्छे नियंत्रण में हैं। पूरे राज्य में और विशेष रूप से पश्चिमी क्षेत्र में, तत्काल बारिश की आवश्यकता है। अन्यथा फसल में गंभीर नमी की समस्या होगी जो पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।’’
महाराष्ट्र और राजस्थान में, फसल 45 से 60 दिन पुरानी है और फली बनने से लेकर फली भरने की अवस्था में है। शीघ्र पकने वाली किस्म की बोई गई फसल दाना भरने की अवस्था में है। कीड़े और खरपतवार अच्छे नियंत्रण में हैं।
सोपा ने कहा, ‘‘हालांकि आज की तारीख में कुल फसल की स्थिति सामान्य है, तत्काल बारिश की आवश्यकता है और बारिश में किसी भी देरी की स्थिति में फसल के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिससे पैदावार कम होगी, खासकर मराठवाड़ा (महाराष्ट्र) में जहां सोयाबीन खेती के तहत पर्याप्त रकबा है।’’
इसमें कहा गया है कि अन्य राज्यों में भी स्थिति इसी तरह की है और तत्काल बारिश की आवश्यकता है।
सोपा के अनुसार, फसल वर्ष 2021-22 के दौरान सोयाबीन का रकबा 114.5 लाख हेक्टेयर, उपज 1,084 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर और कुल उत्पादन 124.11 लाख टन था।
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