जरुरी जानकारी | चालू खाते का अधिशेष 30 जून को समाप्त तिमाही में बढ़कर 6.5 अरब डॉलर पर

मुंबई, 30 सितंबर देश के चालू खाते में 30 जून 2021 को समाप्त तिमाही में 6.5 अरब डॉलर का अधिशेष रहा है। यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.9 प्रतिशत है।

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार व्यापार घाटे में कमी और सेवा प्राप्तियों में वृद्धि के कारण यह स्थिति बनी है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीएआई) ने बृहस्पतिवार को कहा कि इससे पिछले वित्त वर्ष की चौथी यानी जनवरी-मार्च तिमाही में चालू खाते का घाटा 8.1 अरब डॉलर था जो कि जीडीपी का 1.0 प्रतिशत था। वहीं, एक साल पहले की इसी अवधि में चालू खाते का अधिशेष 19.1 अरब डॉलर था, जो सकल घरेलू उत्पाद का 3.7 प्रतिशत रहा था।

इसके अलावा कोविड-19 महामारी से प्रभावित वित्त वर्ष 2020-21 में चालू खाते में 0.9 प्रतिशत का अधिशेष रहा था। जबकि वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान इसमें 0.9 प्रतिशत की कमी

आई थी।

आरबीआई के अनुसार, ‘‘चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान देश के चालू खाते में 6.5 अरब डॉलर का अधिशेष दर्ज किया जो जीडीपी का 0.9 प्रतिशत है। वही इससे पिछली वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में चालू खाते में 8.1 अरब डॉलर का घाटा यानी जीडीपी का एक प्रतिशत घाटा रहा था।’’

केंद्रीय बैंक ने कहा कि वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में चालू खाते में अधिशेष का मुख्य कारण व्यापार घाटे के 41.7 अरब डॉलर से कम होकर 30.7 अरब डॉलर रहना बताया है। वहीं सेवाओं में शुद्ध प्राप्ति बढ़ी है।

देश में विदेशी मुद्रा की कुल प्राप्ति और कुल भुगतान के अंतर को चालू खाते का घाटा कहा जाता है।

जतिन

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