देश की खबरें | माकपा ने वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता एन. शंकरैया के निधन पर दुख जताया

नयी दिल्ली, 15 नवंबर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने स्वतंत्रता सेनानी एवं वरिष्ठ मार्क्सवादी एन. शंकरैया के निधन पर बुधवार को दुख व्यक्त किया। शंकरैया देश के सबसे पुराने कम्युनिस्ट नेताओं में से एक थे।

वह 101 वर्ष के थे।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो ने एक बयान में कहा कि शंकरैया तमिलनाडु के मदुरै में अमेरिकन कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गए थे। उन्हें अंतिम परीक्षा से ठीक पहले गिरफ्तार कर लिया गया और इसलिए उन्हें डिग्री नहीं मिल सकी। कुल मिलाकर, शंकरैया ने स्वतंत्रता की पूर्व संध्या तक आठ साल जेल में बिताये।

वह 1940 में कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हुए और तमिलनाडु में अविभाजित पार्टी के प्रमुख आयोजकों में से एक बने। शंकरैया राष्ट्रीय परिषद के उन 32 सदस्यों में से एक थे, जिन्होंने बाद में माकपा बनाने के लिए पार्टी छोड़ दी। उन्होंने तमिलनाडु में कम्युनिस्ट आंदोलन खड़ा करने में बड़ा योगदान दिया और 1995 से 2002 तक पार्टी की प्रदेश समिति के सचिव के रूप में कार्य किया।

शंकरैया 1967, 1977 और 1980 में तीन बार तमिलनाडु विधानसभा के लिए चुने गए। वह 1977 और 1980 में विधानसभा में माकपा के नेता थे। शंकरैया एक किसान आंदोलन में भी शामिल थे और अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव और अध्यक्ष बने।

माकपा ने कहा, "शंकरैया एक सशक्त वक्ता थे, जो लोगों के बीच कम्युनिस्ट राजनीति और नीतियों को प्रभावी ढंग से संप्रेषित कर सकते थे। वह एक समर्पित मार्क्सवादी थे, जो पार्टी के प्रति समर्पित थे और उन्होंने सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और सादगी के उच्च मानक स्थापित किए।"

उसने कहा, ‘‘उनके निधन से कम्युनिस्ट आंदोलन ने गौरवशाली रिकॉर्ड वाला एक नेता खो दिया है, लेकिन उनकी विरासत कायम है। पोलित ब्यूरो उनकी स्मृति को श्रद्धांजलि देता है और उनके दो बेटों और परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता है।’’

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