देश की खबरें | सीपीसीबी को तीन महीने के भीतर सितारगंज के लिए पर्यावरण बहाली योजना तैयार करने का निर्देश
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 17 सितम्बर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के नेतृत्व वाली एक कमेटी को उत्तराखंड के सितारगंज क्षेत्र के लिए तीन महीने के भीतर पर्यावरण को बहाल करने की एक योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। एनजीटी ने यह निर्देश तब दिया जब सीपीसीबी ने यह पाया कि वहां औद्योगिक इकाइयां प्रदूषण नियमों का उल्लंघन कर रही हैं।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल के नेतृत्व वाली एक पीठ ने कहा कि पर्यावरण को बहाल करने, निवासियों को पेयजल आपूर्ति और पीड़ितों को मुआवजे के वितरण के लिए कदम उठाये जाने जरूरी हैं।

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अधिकरण ने कहा कि उसे इसको लेकर कोई संदेह नहीं कि उत्तराखंड के सिद्ध गरब्यांग गांव के आसपास स्थित उद्योगों से वायु एवं जल प्रदूषण हो रहा है।

पीठ ने कहा, ‘‘इसके मद्देनजर, आकलन के अनुसार क्षतिपूर्ति वसूल करके राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास जमा की जा सकती है। संयुक्त कमेटी तीन महीने के भीतर पर्यावरण बहाल करने की एक योजना तैयार कर सकती है और उसे राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उधम सिंह नगर के जिला मजिस्ट्रेट की देखरेख में निष्पादित कर सकती है।’’

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पीठ ने कहा, ‘‘समन्वय और अनुपालन के लिए नोडल एजेंसी जिला मजिस्ट्रेट, ऊधमसिंह नगर होंगे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पीड़ितों के दावों का आकलन कर सकता है, यदि कोई है तो और यदि कोई दावा 31 दिसंबर, 2020 तक दायर नहीं किया जाता है, तो संपूर्ण या बची राशि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को लौटाई जा सकती है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘यदि आकलन की गयी क्षतिपूर्ति का भुगतान प्रदूषण करने वाली इकाइयों द्वारा नहीं किया जाता है तो राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) इकाई को बंद करने सहित अन्य कदम उठा सकता है।’’

अधिकरण ने इससे पहले उत्तराखंड गांव के उन निवासियों की एक शिकायत पर अधिकरण की मदद करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता राज पंजवानी और अधिवक्ता मीरा गोपाल को नियुक्त किया था जिन्होंने आसपास के क्षेत्रों में उद्योगों द्वारा अनुपचारित रासायनिक अपशिष्ट नालियों में बहाये जाने का आरोप लगाया था।

ग्रामीणों ने दावा किया था कि सिद्ध गरब्यांग के आसपास के इलाके में स्थित एसआईडीसीयूएल औद्योगिक पार्क में बड़ी संख्या में उद्योगों द्वारा पर्यावरण कानूनों और प्रदूषण नियमों का पूरी तरह से उल्लंघन किया जा रहा है।

एनजीटी ने उत्तराखंड सरकार, उधमसिंह नगर जिला मजिस्ट्रेट, एसपीसीबी और एसआईडीसीयूएल के प्रबंध निदेशक को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था।

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