मुंबई, छह अगस्त रिवर्ज बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बृहस्पतिवार को आगाह करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी का संक्रमण लम्बे समय तक खिंचा तो उससे घरेलू अर्थव्यवस्था की हालत और खराब हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक आर्थिक वृद्धि में तेजी लाने के लिये उपलब्ध मौद्रिक गुंजाइश का विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग करेगा।
गवर्नर ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान कहा कि हालांकि चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि नकारात्मक रहेगी लेकिन महामारी पर पहले काबू पा लिया गया तो उसका अर्थव्यस्था पर ‘अनुकूल’ प्रभाव पड़ेगा।
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दास की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने तीन दिन चली बैठक के बाद नीतिगत दर को यथावत रखने का निर्णय किया।
एमपीसी ने कहा कि कठिन वैश्विक माहौल में अर्थव्यवस्था काफी दबाव में है। परिदृश्य को लेकर व्यापक अनिश्चितता है जो महामारी की तीव्रता, उसके फैलाव और अवधि तथा टीके की खोज पर निर्भर है।
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आरबीआई ने यह भी कहा कि आर्थिक वृद्धि को फिर से पटरी पर लाने, कोविड-19 के प्रभाव को कम करने के लिये जब तक जरूरी समझा जायेगा मौद्रिक नीति के रुख को नरम बनाये रखा जाएगा।
गवर्नर ने कहा, ‘‘एमपीसी ने यह रेखांकित किया कि इस अभूतपूर्व दबाव के परिवेश में अर्थव्यवस्था के पुनरूद्धार को समर्थन देना मौद्रिक नीति के लिये महत्वपूर्ण है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि मौद्रिक नीति के स्तर पर आगे और कदम की गुंजाइश है लेकिन यह जरूरी है कि इसका विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग हो ताकि आर्थिक गतिविधियों के लिये उसका लाभ अधिकतम हो। साथ ही एमपीसी मध्यम अवधि के मुद्रास्फीति के लक्ष्य को लेकर भी सचेत है।’’
एमपीसी के अनुसार अप्रैल-मई में निम्न स्तर पर पहुंचने के बाद से जून में कुछ क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां शुरू होने के साथ अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिखे थे।
उसने कहा कि लेकिन संक्रमण के फिर से बढ़ने से कई शहरों और राज्यों में फिर से ‘लॉकडाउन’ लगाया गया। परिणामस्वरूप जो तेजी देखी जा रही थी, वे फिर धीमे पड़ गये।
रिजर्व बैंक के दस्तावेज के अनुसार, ‘‘कृषि क्षेत्र एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभरा है। दक्षिण पश्चिम मानसून के बेहतर होने से इसकी संभावना और बेहतर हुई है।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘औषधि को छोड़कर सभी विनिर्माण उप क्षेत्रों नकारात्मक दायरे में बने हुए हैं। जून में बुनियादी उद्योगों में लगातार चौथे महीने गिरावट दर्ज की गयी। हालांकि गिरावट की दर कम हुई है।’’
मई-जून के लिये सेवा क्षेत्र के उच्च आवृत्ति वाले संकेतकों के अनुसार यह बताता है कि आर्थिक गतिविधियों में हल्की तेजी आयी है। यह तेजी खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में आयी है। हालांकि यह तेजी एक साल पहले इसी अवधि की तुलना में नीचे है।
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