देश की खबरें | पराली जलाने पर मशीन से रोक लगने का दावे किये जाने के बाद न्यायालय का पंजाब सरकार को नोटिस

नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को पंजाब सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें धान की पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए फसल कटाई यंत्र के साथ एक विशेष मशीन अनिवार्य रूप से जोड़ने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

न्यायमूर्ति अभय एस ओका, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्ला और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और अवतार सिंह फगवाड़ा द्वारा दायर याचिका पर जवाब मांगा।

फगवाड़ा, गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सम्पूर्ण खेती पूर्ण रोजगार संचालित करते हैं।

याचिकाकर्ता ने कहा कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना ने हाल ही में ‘‘बुवाई सह कटाई’’ मशीन का आविष्कार किया है, जिसे धान की कटाई करते समय संयुक्त ‘हार्वेस्टर’ (फसल कटाई यंत्र) के साथ जोड़ा जाता है।

याचिका में दावा किया गया है, ‘‘इस मशीन से पराली को खेत में बिछाया जाता है और साथ ही गेहूं की फसल की बुआई भी हो जाती है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस मशीन के इस्तेमाल करने पर धान की पराली जलाने पर रोक लगेगी।’’

उन्होंने कहा कि सफल परीक्षणों के बावजूद पंजाब सरकार इसे बढ़ावा नहीं दे रही है।

शीर्ष अदालत ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) से भी याचिका पर जवाब देने को कहा।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एच एस फुल्का ने कहा कि इस मशीन के किफायती होने के साथ-साथ, यह आसानी से उपयोग में भी लाई जा सकती है। इसके लिए न्यूनतम मशीनरी और कम अश्व शक्ति वाले ट्रैक्टर की आवश्यकता होती है।

याचिका में कहा गया है कि मशीन की लागत लगभग 1.20 लाख रुपये है, जबकि ‘सुपर-सीडर’ की लागत 2.50 लाख रुपये है।’’

याचिका में कहा गया है, ‘‘पंजाब सरकार सुपर-सीडर पर 1 लाख रुपये की सब्सिडी दे रही है, लेकिन इस नयी मशीन का प्रचार बिल्कुल नहीं कर रही है, जो कि कहीं अधिक किफायती और सरल है।’’

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सुपर-सीडर के लिए 50 एचपी (अश्व शक्ति) के ट्रैक्टर की आवश्यकता होती है, जिससे परिचालन लागत अधिक आती है।

याचिका में कहा गया है, ‘‘छोटे किसानों के पास आमतौर पर 25 एचपी का ट्रैक्टर होता है। वास्तव में, छोटे किसान न तो सुपर-सीडर जैसी महंगी मशीनें खरीद सकते हैं और न ही महंगी परिचालन लागत वहन कर सकते हैं।’’

याचिकाकर्ता ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के कुलपति को मशीन के परीक्षण के परिणाम की जानकारी शीर्ष अदालत को देने का निर्देश दिये जाने का भी अनुरोध किया।

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