देश की खबरें | न्यायालय ने दिव्यांगों को भूमि आवंटन मामले में जवाब नहीं देने को लेकर महाराष्ट्र सरकार को चेताया

मुंबई, एक अगस्त बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी दी है कि अगर वह विकलांगता अधिनियम के तहत दिव्यांगों को रियायती दरों पर भूमि आवंटन में पांच प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित अदालत के सवाल का जवाब देने में विफल रहती है तो उसके अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की जाएगी।

न्यायमूर्ति गौतम पटेल और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने अपने आदेश में अधिनियम के तहत राहत के अनुरोध वाली दायर याचिका पर "सार्थक प्रतिक्रिया" व्यक्त करने में सरकार की विफलता पर नाराजगी व्यक्त की।

अदालत ने राज्य सरकार को "आखिरी मौका" देते हुए कहा कि "यह सबसे शर्मनाक स्थिति है।"

दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम की धारा 37 (सी) के तहत, सरकार दिव्यांग व्यक्तियों के लिए योजनाएं बनाती है और आवास, आश्रय, व्यवसाय, मनोरंजन केन्द्र स्थापित करने के लिए रियायती दरों पर भूमि आवंटन में पांच प्रतिशत आरक्षण प्रदान करती है।

अदालत 31 जुलाई को, प्रावधान को लागू करने का अनुरोध करने वाले राजेंद्र लालजारे द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

पीठ ने कहा कि याचिका 2020 में दायर की गई थी और इसे समय-समय पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है और हर बार सुनवाई स्थगित की गई ताकि सरकार अपना हलफनामा दाखिल कर सके।

पीठ ने कहा कि वह सरकार को दिव्यांगता अधिनियम की धारा 37 (सी) के तहत उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए हलफनामा दाखिल करने के लिए अंतिम मौका दे रही है। पीठ ने कहा कि हलफनामा दाखिल नहीं किए जाने की स्थिति में वह कार्रवाई करेगी।

अदालत ने मामले की सुनवाई 21 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी।

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