देश की खबरें | अदालत ने निर्माण श्रमिकों के पंजीकरण पर निर्देशों का पालन नहीं करने को लेकर दिल्ली सरकार के चेताया
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर दिल्ली सरकार ने नगर सरकार के भवन एवं अन्य निर्माण मजदूर कल्याण बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह मजदूरों का पंजीकरण और सदस्यता नवीनीकरण के उसके आदेश को लागू करे और आगाह किया है कि ऐसा नहीं करने पर वह सख्त रुख अपनाएगी।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने कहा कि जब तक उच्चतम न्यायालय उसके आदेश को खारिज ना कर दे या रोक ना लगा दे, तब तक बोर्ड को उसके निर्देशों का पालन करना होगा।

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इन निर्देशों के साथ पीठ ने मामले की सुनवाई 21 अक्टूबर को सूचीबद्ध कर दी।

वकील शील त्रेहन और शिवेन वर्मा ने पीठ को सूचित किया कि पंजीकरण की प्रक्रिया और पंजीकरण के नवीनीकरण के संबंध में अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं किया जा रहा था और विभिन्न कारण से कई मुद्दे सामने आ रहे हैं। इसके बाद उच्च न्यायालय ने उक्त निर्देश दिए।

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त्रेहन ने कहा कि वह मजदूरों को पेश आ रहे मसलों के संबंध में एक लघु नोट दायर करेंगी।

बोर्ड की ओर से पेश हुए दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता संजॉय घोष और वकील उरवी मोहन ने अदालत को बताया कि पीठ की सहायता के लिए बोर्ड के सचिव सुनवाई की अगली तारीख से उपस्थित होंगे।

उन्होंने कहा कि अपने नोट में त्रेहन द्वारा उठाए गए मुद्दे का भी अगली तारीख को जवाब दिया जाएगा।

अदालत सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार अलेदिया की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में भवन एवं अन्य निर्माण मजदूर कल्याण कानून के तहत यहां के सभी निर्माण मजदूरों का पंजीकरण करने का अनुरोध किया गया था ताकि उन्हें लॉकडाउन के दौरान हर मजदूर को दिए जा रहे पांच हजार रुपये प्रति माह के राहत पैकेज का लाभ मिल सके।

इसे लेकर अदालत समय समय पर निर्देश जारी करती रही है।

इस संबंध में दिया गया एक निर्देश यह था कि मजदूरों के पंजीकरण या नवीनीकरण का सत्यापन वीडियो कॉल के जरिए किया जाए और उन्हें व्यक्तिगत तौर पर तभी बुलाया जाए जब वीडियो कॉल संभव नहीं हो।

अदालत ने कहा था कि इससे सुनिश्चित होगा कि जो मजदूर अपने गांव चले गए हैं वह दिल्ली सरकार द्वारा दी जा रही अनुग्रह राशि से इस आधार पर महरूम न हो कि उनका व्यक्तिगत सत्यापन नहीं हुआ था।

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