नयी दिल्ली, 14 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने स्कूली बच्चों के मध्याह्न भोजन योजना से चिकन समेत मांसाहारी व्यंजनों को बाहर करने के लक्षद्वीप प्रशासन के फैसले को बृहस्पतिवार को बरकरार रखा और कहा कि अदालत यह तय नहीं कर सकती कि क्या खाया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने लक्षद्वीप प्रशासन के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी और कहा कि अदालतें प्रशासनिक फैसलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं।
पीठ ने कहा, “यह अदालत का अधिकार क्षेत्र नहीं है कि किसी विशेष क्षेत्र के बच्चों को क्या खाना चाहिए। इस मामले में अदालतों के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। नीतिगत निर्णय न्यायिक समीक्षा के दायरे में नहीं आता।”
शीर्ष अदालत डेयरी फार्मों को बंद करने और मध्याह्न भोजन से चिकन सहित मांसाहारी व्यंजनों को हटाने के केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
केरल उच्च न्यायालय ने 22 जून, 2021 को डेयरी फार्मों को बंद करने और स्कूली बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन से मांसाहारी व्यंजनों को हटाने के लक्षद्वीप प्रशासन के दो आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी।
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने सितंबर 2021 में कवरत्ती के मूल निवासी अजमल अहमद की एक जनहित याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि प्रफुल्ल खोड़ा पटेल ने लक्षद्वीप प्रशासक के रूप में कार्यभार संभालने के बाद पशुपालन विभाग की डेयरी फर्मों को बंद करने और प्राचीन काल से चली आ रही द्वीपवासियों की भोजन की आदतों पर ‘हमला’ करने की कोशिश की।
अहमद ने पशुपालन निदेशक के 21 मई 2021 के उस आदेश को चुनौती दी जिसमें सभी डेयरी फार्म को बंद करने के निर्देश दिये गये थे। अहमद ने कहा कि यह प्रस्तावित पशु संरक्षण (विनियमन), 2021 को लागू करने के इरादे से किया गया है जो गायों, बछड़ों और बैलों के वध पर प्रतिबंध लगाता है।
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