मुंबई, 11 मई महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय ने राज्य के राजनीतिक संकट पर अपने फैसले में विधायकों की अयोग्यता को लेकर उनके रुख को बरकरार रखा है।
लंदन में मौजूद नार्वेकर ने एक स्थानीय समाचार चैनल से कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित 16 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने संबंधी याचिका पर फैसला करना विधानसभा अध्यक्ष का विशेषाधिकार होगा। मैं लगातार इस बात को कह रहा हूं कि विधानसभा अध्यक्ष ही इस मामले में फैसला लेंगे।’’
उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष से यह तय करने को कहा है कि विधायक दल का प्रतिनिधित्व कौन करता है- निर्वाचित प्रतिनिधि या राजनीतिक दल।
नार्वेकर ने कहा कि अदालत ने पाया है कि इस बारे में फैसला केवल विधानसभा अध्यक्ष करेंगे।
शिंदे द्वारा मुख्य सचेतक के रूप में भरत गोगावाले की नियुक्ति को उच्चतम न्यायालय द्वारा ‘अवैध’ करार दिए जाने संबंधी सवाल पर नार्वेकर ने कहा, ‘‘मैं उच्चतम न्यायालय के फैसले को स्वीकार करता हूं और मैं अपने वकीलों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने के बाद इस पर टिप्पणी करूंगा। राज्य सरकार सुरक्षित है और मैं इसके लिए खुश हूं।’’
उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि पिछले साल 30 जून को महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल द्वारा तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को बुलाना सही नहीं था। हालांकि, न्यायालय ने पूर्व की स्थिति बहाल करने से इनकार करते हुए कहा कि ठाकरे ने शक्ति परीक्षण से पहले ही इस्तीफा दे दिया था।
महाराष्ट्र में पिछले साल शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे नीत महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार गिरने और फिर उत्पन्न राजनीतिक संकट से जुड़ी अनेक याचिकाओं पर सर्वसम्मति से अपने फैसले में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि शिंदे गुट के भरत गोगावाले को शिवसेना का सचेतक नियुक्त करने का विधानसभा अध्यक्ष का फैसला ‘अवैध’ था।
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