नयी दिल्ली, 17 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के तत्कालीन चेयरमैन अनिल अंबानी की दो कंपनियों को दिये गये 1200 करोड़ रूपए के कर्ज की वसूली के लिये उनके खिलाफ दिवाला कार्यवाही शुरू करने की अनुमति के लिये स्टेट बैंक का आवेदन बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया।
शीर्ष अदालत ने अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही पर रोक लगाने के दिल्ली उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश को हटाने से इंकार कर दिया।
अनिल अंबानी ने अगस्त 2016 में आरकाम और रिलायंस इंफ्राटेल लि के लिये क्रमश: 565 करोड़ और 635 करोड़ रूपए के कर्ज के लिये स्टेट बैंक को व्यक्तिगत गारंटी दी थी।
न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव , न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट की पीठ ने उच्च न्यायालय से कहा था कि इस मामले के महत्व को देखते हुये छह अक्टूबर को विचार किया जाये और इसकी सुनवाई स्थगित किये बगैर ही फैसला किया जाये।
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पीठ ने बैंक से कहा था कि वह स्थगन आदेश में किसी भी प्रकार के सुधार के लिये उच्च न्यायालय से अनुरोध करने के लिये स्वतंत्र है।
अंबानी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने दलील दी कि किसी व्यक्ति को दिवालिया घोषित करने के गंभीर परिणाम होते हैं। उन्होंने दिवाला कार्यवाही पर लगाई गयी रोक हटाने का विरोध किया।
उच्च न्यायालय ने 27 अगस्त को इस कर्ज की वसूली के सिलसिले में अनिल अंबानी के खिलाफ दिवाला कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
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