नयी दिल्ली, 20 जून उच्चतम न्यायालय ने आईआरईओ समूह के प्रबंध निदेशक ललित गोयल और ओबेरॉय रियल्टी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विकास ओबेरॉय के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी के आरोपों से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति पी.वी. संजय कुमार और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अवकाशकालीन पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया।
पीठ ने कहा, “यह प्रश्न कि क्या दूसरी शिकायत दर्ज करना प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा और क्या शिकायतकर्ता ने गलत मंशा से अदालत का दरवाजा खटखटाया था, इस पर आगे जांच की आवश्यकता है। प्रतिवादियों को नोटिस जारी करें...इस बीच, प्राथमिकी के संबंध में आगे की कार्यवाही पर रोक रहेगी।”
शीर्ष अदालत आईआरईओ और ओबेरॉय समूहों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के 6 जून के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें प्राथमिकी दर्ज करने को बरकरार रखा गया था।
एडवांस इंडिया प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (एआईपीएल) द्वारा कथित धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी के लिए दर्ज करायी गयी शिकायत के बाद डीएलएफ फेज-2 पुलिस थाने में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की गई।
एफआईआर के अनुसार, आईआरईओ और ओबेरॉय - दोनों रियल्टी समूह - पर 2013 से निवेश किए गए आवंटियों को धोखा देने की साजिश रचने का आरोप है, जिससे न केवल निवेशकों को धोखा दिया गया, बल्कि एआईपीएल समूह को भी धोखा दिया गया।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY