नयी दिल्ली, 28 जुलाई राष्ट्रीय राजधानी की एक सत्र अदालत ने 2012 में एक नाबालिग लड़की का कथित रूप से अपहरण करने के मामले में मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा एक व्यक्ति को सुनाई गई दो साल की सज़ा को खारिज कर दिया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली शर्मा ने मजिस्ट्रेट अदालत के जनवरी 2019 के फैसले के खिलाफ बाबू की ओर से दायर अपील पर सुनवाई की।
मजिस्ट्रेट अदालत ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 363 के तहत व्यक्ति को दोषी ठहराते हुए दो साल कैद की सज़ा सुनाई थी।
अभियोजन के मुताबिक, आरोपी ने दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके से 30 जनवरी 2012 को 17 वर्षीय लड़की का अपहरण कर लिया था।
सत्र न्यायाधीश ने हाल में पारित आदेश में कहा, “ मेरी राय है कि अभियोजन संदेह के दायरे से परे आरोपी का दोष साबित करने में नाकाम रहा है। इसलिए निचली अदालत द्वारा आरोपी को आईपीसी की धारा 363 के तहत दोषी ठहराने के 24 दिसंबर 2019 और सज़ा पर 18 जनवरी 2020 के फैसले को खारिज किया जाता है तथा अपील स्वीकार की जाती है।”
उन्होंने कहा कि बाबू को बरी किया जाता है। अदालत ने कहा कि पीड़िता ने बार-बार अपना बयान बदला और यह बात भी नामुकिन है कि दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा को जब अगवा कर आगरा ले जाया गया था तो उसने शोर नहीं मचाया।
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