नयी दिल्ली, 10 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने चंडीगढ़ प्रशासन की इस पात्रता शर्त को खारिज कर दिया है कि दो प्रतिशत खेल कोटा के तहत इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए परीक्षार्थी को योग्यता परीक्षा में 75 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होंगे। अदालत ने कहा कि असमान पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले व्यक्तियों के मामले में समान योग्यता की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।
पात्रता शर्त को बरकरार रखने वाले पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले को खारिज करते हुए, शीर्ष अदालत ने कहा कि यह "भेदभावपूर्ण" और संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत "समानता खंड के विपरीत" है।
न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने कहा, “इसलिए, न्यूनतम 75 प्रतिशत अंक की पात्रता शर्त लागू करने से खेल कोटा शुरू करने का उद्देश्य पूरा नहीं होता, बल्कि यह विनाशकारी है; भेदभावपूर्ण है; यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) में समानता खंड का उल्लंघन है।”
न्यायमूर्ति भट ने बुधवार को सुनाया गया फैसला लिखते हुए कहा कि खेल कोटा शुरू करने का उद्देश्य उन लोगों को बढ़ावा देना और प्रोत्साहित करना है जिन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और प्रतिस्पर्धी खेलों में कुछ हद तक निर्धारित दक्षता व उपलब्धि हासिल की।
फैसले में कहा गया, “इस कोटे की शुरुआत शैक्षणिक संस्थानों में खेलों और खेल कौशल को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। इसमें कोई संदेह नहीं है, राज्य अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं को देखते हुए, किसी विशेष पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए न्यूनतम पात्रता मानक या मानदंड निर्धारित करने के अपने अधिकारों के तहत कार्य करता है।”
फैसले में कहा गया है कि शर्त ऐसी नहीं हो सकती जो शैक्षणिक संस्थानों में खेलों को बढ़ावा देने की नीति की मंशा को विफल कर दे।
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