नयी दिल्ली, पांच अगस्त उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को एक अधिसूचना के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा, जिसके अनुसार 10 करोड़ रुपये से कम की चुकता पूंजी वाली सार्वजनिक और निजी कंपनियों को पूर्णकालिक कंपनी सचिव की नियुक्ति से छूट दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने इस आशय की याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र को नोटिस जारी किया।
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याचिका में चूक के मामलों को देखने के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाने की मांग की गई है। इन मामलों के कारण देश भर में छह लाख से अधिक कंपनियां बंद हो गई हैं।
याचिका में फर्जी कंपनियों के गठन और संचालन के लिए जिम्मेदार अपराधियों की कॉरपोरेट जवाबदेही तय करने की मांग भी की गई है, जिनके माध्यम से हेरफेर के जरिए देश के वित्तीय बुनियादी ढांचे को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।
याचिका में कहा गया कि गत तीन जनवरी की अधिसूचना के मुताबिक 10 करोड़ रुपये से अधिक चुकता पूंजी वाली कंपनियों को पूर्णकालिक कंपनी सचिव नियुक्त करना होगा। याचिकाकर्ता ने इस अधिसूचना को सरकार के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र बाहर बताया है। इसके पीछे
अपना तर्क देते हुए अधिवक्ता शशांक देव सुधी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि इसका अर्थ है कि 10 करोड़ रुपये से कम चुकता पूंजी वाली सभी सार्वजनिक और निजी कंपनियों को पूर्णकालिक कंपनी सचिव की नियुक्ति से पूरी तरह छूट दे दी गई है।
याचिका में कॉरपोरेट प्रशासन के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करने के संबंध में केंद्र से दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई है।
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