देश की खबरें | न्यायालय ने स्तनपान कराने वाली गरीब मांओं की मदद के लिये अर्जी पर केन्द्र से मांगी रिपोर्ट

नयी दिल्ली, 14 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने देश में कोरोना महामारी के दौरान स्तनपान कराने वाली मांओं की आर्थिक मदद के लिये दायर आवेदन पर मंगलवार को केन्द्र सरकार को स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये एक गैर सरकारी संगठन के आवेदन पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया।

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पीठ ने सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश दिया कि देश में स्तनपान कराने वाली गरीब मांओं की मदद के लिये उठाये गये कदमों के विवरण के साथ स्थिति रिपोर्ट पेश की जाये।

गैर सरकारी संगठन पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज ने 2015 से लंबित अपनी जनहित याचिका में यह आवेदन दायर किया है।

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इस संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोन्जाल्विस ने सुनवाई के दौरान कहा कि केन्द्र ने अपनी योजना के तहत लॉकडाउन के दौरान गर्भवती और स्तनपान कराने वाली प्रत्येक महिला के लिये 6000 रूपए प्रतिमाह मंजूर किये थे।

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान गर्भवती या स्तनपान कराने वाली गरीब महिलाओं को इस योजना के तहत दी गयी आर्थिक मदद का विवरण केन्द्र सरकार से मांगा जाये।

सरकार की ‘जननी सुरक्षा योजना’ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित मातृत्व कार्यक्रम है। इसे गरीब गर्भवती महिलाओं में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देकर मातृत्व एवं नवजात मृत्यु दर घटाने के उद्देश्य से कार्यान्वित किया जा रहा है।

गोन्जाल्विस ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की अधिक मृत्युदर के मद्देनजर यह बहुत ही महत्वपूर्ण मामला है।

न्यायालय ने मूल याचिका पर चार सितंबर, 2015 को उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को नोटिस जारी किये थे।

इस याचिका में सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और मातृत्व लाभ योजना सही तरीके से लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

अनूप

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