नयी दिल्ली, दो सितंबर, उच्चतम न्यायालय ने करोड़ों रूपए के सार्वजनिक वितरण प्रणाली घोटाले में एक गवाह की याचिका पर छत्तीसगढ़ सरकार से जवाब मांगा है। इस याचिका में आरोप लगाया है कि निचली अदालत में चल रही कार्यवाही में बाधा डालने के हर तरह के प्रयास किये जा रहे हैं।
न्यायमूर्ति रोहिंग्टन एफ नरिमन, न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी की पीठ ने इस याचिका पर राज्य सरकार, उसके आथिक अपराध प्रकोष्ठ और विशेष जांच दल को भी नोटिस जारी किये। याचिका में 36,000 करोड़ रूपए के इस कथित घोटाले का मुकदमा छत्तीसगढ़ से बाहर स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया है।
पीठ ने इस मामले में प्रतवादी बनाये गये कुछ नौकरशाहों को भी नोटिस जारी किये हैं। इन सभी को चार सप्ताह के भीतर याचिका के साथ ही स्थगन के लिये आवेदन पर नोटिस का जवाब देना है।
शीर्ष अदालत छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम, रायपुर में कार्यरत कर्मचारी गिरीश शर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार निचली अदालत में इस मुकदमे की कार्यवाही को बाधित करने के सभी प्रयास कर रही है।
याचिकाकर्ता ने इस मुकदमें को राज्य से बाहर स्थानांतरित करने का अनुरोध करते हुये कहा है कि वह ‘नान घोटाले’ के नाम से चर्चित इस मामले में एक महत्वपूर्ण गवाह है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि दिसंबर, 2018 से राज्य सरकार इस मामले की सुनवाई को निष्फल बनाने का प्रयास कर रही है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और अधिवकता रवि शर्मा ने सुनवाई के दौरान इस मामले का स्थानांतरण करने और शीर्ष अदालत द्वारा इसकी प्रगति की निगरानी करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता के साथ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया जाये।
छत्तीसगढ के रायपुर स्थित आर्थिक अपराध जांच इकाई और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 12 फरवरी, 2015 को जिले में नागरिक आपूर्ति निगम और राज्य भंडारगृह निगम के कार्यालयों और अधिकारियों के घरों पर छापे मारे थे और निगम के अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
प्रवर्तन निदेशालय ने इस घोटाले के संबंध में दो आईएएस अधिकारियों के खिलाफ धनशोधन का मामला दर्ज किया था।
अनूप
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