नयी दिल्ली, 18 जून दिल्ली की एक अदालत ने डकैती के एक मामले में एक आरोपी को यह कहते हुए जमानत दे दी कि मुकदमे में काफी समय लगेगा।
अवकाशकालीन न्यायाधीश अपर्णा स्वामी ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए आरोपी सागर को राहत प्रदान की।
उच्चतम न्यायालय के उस फैसले के मुताबिक, जमानत आवेदनों का निर्णय करते समय मुकदमे के निष्कर्ष में देरी के महत्वपूर्ण कारक को अदालत द्वारा निश्चित रूप से ध्यान में रखा जाना चाहिए।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘मौजूदा आरोपी की कोई अन्य संलिप्तता नहीं है। इसके मुकदमे में काफी समय लगेगा। आरोपी को हिरासत में रखने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा... इसी को देखते हुए आरोपी सागर को जमानत दी जाती है।’’
सागर को यह राहत 50,000 रुपये के मुचलके और इतने की ही एक स्थानीय जमानत राशि पर दी गई।
न्यायाधीश ने आरोपी को जांच अधिकारी द्वारा बुलाए जाने पर जांच में शामिल होने और अदालत की अनुमति के बिना दिल्ली नहीं छोड़ने का निर्देश भी दिया।
उन्होंने 12 जून को पारित एक आदेश में कहा, ‘‘आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा।’’
आरोपी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 392 और 411 सहित अन्य धाराओं के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तार किया गया था। उसने अदालत को बताया कि वह 11 मार्च से हिरासत में है और मामले में आरोपपत्र पहले ही दायर किया जा चुका है।
अभियोजन पक्ष ने आरोपी सागर की जमानत अर्जी का विरोध किया था।
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