देश की खबरें | अदालत ने आरक्षण कार्यकर्ता जरांगे को सरकार चिकित्सकों से जांच कराने का निर्देश दिया

मुंबई, 15 फरवरी बंबई उच्च न्यायालय ने मराठा आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे कार्यकर्ता मनोज जरांगे को बृहस्पतिवार को राज्य सरकार के डॉक्टरों को उनकी जांच करने और उपचार करने देने का निर्देश दिया।

उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कहा कि जब महाराष्ट्र सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठा रही है कि जरांगे और अन्य लोग अपना शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर सकें तो कार्यकर्ता को भी कुछ सहयोग करना चाहिए।

अदालत ने कहा कि राज्य सरकार और प्रत्येक हितधारक की चिंता है कि हालत बिगड़नी नहीं चाहिए।

पीठ नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर जरांगे द्वारा घोषित भूख हड़ताल के बीच राज्य भर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ गुणरतन सदावर्ते द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

पिछले महीने, राज्य सरकार के आश्वासन के बाद जरांगे ने मुंबई तक अपने विरोध मार्च को रोक दिया था।

हालांकि वह अपनी इस मांग को लेकर 10 फरवरी से भूख हड़ताल पर बैठ गए कि राज्य के सामाजिक न्याय विभाग द्वारा मराठा समुदाय को कुनबी प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिए पिछले महीने जारी मसौदा अधिसूचना की तर्ज पर कानून लागू किया जाए।

महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने बृहस्पतिवार को अदालत से कहा कि राज्य सरकार जरांगे की सेहत को लेकर चिंतित है।

उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने राज्य के डॉक्टरों को उनकी चिकित्सीय जांच करने या कोई इलाज करने की अनुमति नहीं दी है। उन्हें केवल ड्रिप के जरिये तरल पदार्थ दिया जा रहा है।’’

जरांगे की ओर से अधिवक्ता रमेश दुबे-पाटिल ने कहा कि जरांगे को दो बोतल सलाइन चढ़ाई गई है और उनकी खुद की डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत पर नजर रख रही है।

हालांकि पीठ ने पूछा कि जरांगे राज्य सरकार के डॉक्टरों से जांच कराने और इलाज कराने से इनकार क्यों कर रहे हैं।

पीठ ने वकील से कहा कि जरांगे से निर्देश लें कि क्या वह खुद की जांच की अनुमति देंगे।

इसके बाद उच्च न्यायालय ने उनकी मेडिकल जांच और इलाज डॉक्टरों द्वारा बताए गए अनुसार कराने का निर्देश दिया।

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