देश की खबरें | न्यायालय ने 2002 के गोधरा ट्रेन कांड में तीन दोषियों को जमानत से इनकार किया

नयी दिल्ली, 14 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने 2002 के गोधरा ट्रेन अग्निकांड के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे तीन दोषियों की जमानत याचिकाएं सोमवार को खारिज कर दीं और उसे ‘बहुत गंभीर घटना’ करार दिया जिसके बाद गुजरात में भयावह सांप्रदायिक दंगे हुए थे।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘‘यह घटना बहुत गंभीर थी। किसी एक व्यक्ति की हत्या का सवाल नहीं है।’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि वह मामले में गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली अपीलों को किसी उचित पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगी।

पीठ में न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे। पीठ ने दोषियों सौकत यूसुफ इस्माइल मोहन, बिलाल अब्दुल्ला इस्माइल बादाम घांची और सिद्दीक को इस स्तर पर जमानत पर रिहा करने से इनकार कर दिया।

दोषियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने पीठ से कहा कि निचली अदालत ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी और उनमें से एक साढ़े 17 साल से अधिक समय से हिरासत में है और दूसरा 20 साल से जेल में है।

पीठ ने कहा, ‘‘अपीलकर्ताओं की विशिष्ट भूमिका को ध्यान में रखते हुए, इस स्तर पर, हम उन्हें जमानत पर रिहा करने के इच्छुक नहीं हैं।’’

हेगड़े ने दलील दी कि इनमें से दो पर हिंसा के दौरान पथराव और लोगों के आभूषण लूटने जैसे हल्के फुल्के आरोप हैं।

गुजरात सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने तीनों दोषियों के खिलाफ निचली अदालत के निष्कर्षों का जिक्र किया और कहा कि उनमें से एक मुख्य षड्यंत्रकर्ता है जिसने भीड़ को उकसाया था जिसके पास घातक हथियार थे।

पीठ ने कहा, ‘‘तीनों की सक्रिय भूमिका रही।’’

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