नयी दिल्ली, 13 जून उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय के नार्थ कैम्पस में एक निजी रियल एस्टेट कंपनी द्वारा गगनचुंबी आवासीय परिसर के निर्माण की व्यवहार्यता सहित विभिन्न पहलुओं की पड़ताल करने का एक समिति को निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस की पीठ ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसके तहत इस रियल एस्टेट कंपनी की गतिविधि पर रोक लगा दी गई थी।
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गौरतलब है कि एनजीटी ने पर्यावरण कानून के ‘एहतियाती सिद्धांत’ को लागू करते हुए आठ जनवरी को यंग बिल्डर्स (प्रा.) लिमिटेड को निर्देश दिया था कि निर्माण की कोई गतिविधि नहीं की जाए।
एनजीटी ने परियोजना का मूल्यांकन करने के लिये केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और आईआईटी दिल्ली के प्रतिनिधियों की सदस्यता वाली एक संयुक्त समिति गठित की थी।
इसके बाद, बिल्डर ने शीर्ष न्यायालय में इस आदेश को चुनौती दी थी। शीर्ष न्यायालय ने आदेश निरस्त कर दिया। बाद में अधिकरण ने रियल एस्टेट कंपनी को कोई गतिविधि करने से फिर रोक दिया।
अब शीर्ष न्यायालय ने समिति को परियोजना की व्यवहार्यता सहित विभिन्न पहलुओं की पड़ताल करने का समिति को निर्देश दिया है। साथ ही, एनजीटी द्वारा जाहिर किये गये किसी विचार से प्रभावित हुए बगैर यह करने को कहा गया है।
शीर्ष न्यायालय ने डीयू और दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) को जरूरी दस्तावेजों के साथ अपना जवाब समिति के समक्ष दो हफ्तों के अंदर सौंपने की छूट दी है।
समिति इस संबंध में चर्चा पूरी कर, अपील करने वाले और डीयू तथा डीएमआरसी द्वारा जवाब दाखिल किये जाने की तारीख के दो महीने के अंदर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी।
पीठ ने कहा कि समिति की बैठक वीडियो कांफ्रेंस से होगी।
शीर्ष न्यायालय एनजीटी के आठ जनवरी के आदेश के खिलाफ यंग बिल्डर्स द्वारा की गई अपील पर सुनवाई कर रहा है।
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