देश की खबरें | न्यायालय ने बार एसोसिएशन से वकीलों को भौतिक सुनवाई के लिये प्रेरित करने को कहा

नयी दिल्ली, 23 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन से वकीलों को सुनवाई में भौतिक रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कहा क्योंकि वह कोविड-19 के कारण अदालती कार्यवाही को नियंत्रित करने के लिए बनायी गई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को बदलने पर विचार करने को तैयार है।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने नए एसओपी को “नॉन-स्टार्टर” (बहुत सफल नहीं) करार देकर भौतिक सुनवाई को फिर से शुरू करने का मुद्दा उठाया जिस पर प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा, “हमारे पास वकील आ रहे हैं। हमारे पास हर रोज कुछ वकील आ रहे हैं, अन्य क्यों नहीं आ सकते हैं।”

पीठ ने कहा, “आप (सिंह) बार के अपने सदस्यों को भौतिक रूप से पेश होने की कोशिश करने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्हें आने दें। हम कोशिश कर रहे हैं, हम एसओपी और हर चीज पर विचार करेंगे। कोई मुद्दा नहीं।” पीठ में न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति सूर्यकांत भी शामिल थे।

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) के अध्यक्ष, वकील शिवाजी जाधव ने कहा, “वकीलों को कोई विकल्प न दें। कृपया अदालतों को खोलें।”

शीर्ष अदालत ने पिछले साल मार्च में सुनवाई के डिजिटल तरीके को अपनाया था और हाल ही में हाइब्रिड विकल्प को शुरू किया, जिसमें वकीलों को एक सितंबर से मामलों पर बहस करने के लिए भौतिक रूप से या डिजिटल माध्यम से पेश होने का विकल्प दिया गया।

यह टिप्पणी तब की गई जब पीठ कोविड के कारण अदालती मामलों को दायर करने के लिए सीमा अवधि के विस्तार से संबंधित स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी।

इससे पहले सिंह ने प्रधान न्यायाधीश को लिखे अपने पत्र में कहा था कि इस साल 28 अगस्त को महासचिव द्वारा जारी एसओपी में शीर्ष अदालत परिसर में उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र के लिए विशेष पास जारी करने की व्यवस्था समाप्त की जाए।

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