ग्वालियर (मध्यप्रदेश), आठ अगस्त मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने एक मामले में 18 वर्षीय छात्र को अनोखी शर्त के साथ जमानत पर रिहा करने की मंजूरी दी है। अदालत ने छात्र को दो माह तक सोशल मीडिया से दूर रहकर अपनी पढ़ाई जारी रखने की शर्त पर जमानत दी है।
न्यायमूर्ति आनंद पाठक की एकल पीठ ने यह निर्णय कृषि विज्ञान के छात्र हरेन्द्र त्यागी के जमानत के आवेदन को स्वीकार करते हुए दिया। अदालत ने छात्र को दो महीने तक सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखने और हर महीने डिजिटल डिटॉक्सिफिकेशन की रिपोर्ट थाने में देने को कहा है। अदालत ने शर्त रखी है कि छात्र यदि इसमें असफल रहता है तो उसकी जमानत निरस्त हो जाएगी।
अदालत ने इस सप्ताह मंगलवार को यह निर्णय छात्र की प्री एग्रीकल्चर टेस्ट (पीएटी) की पढ़ाई पूरी करने के लिये दिया है।
छात्र के वकील सुशांत तिवारी ने कहा कि भिंड जिले के रहने वाले त्यागी के खिलाफ झूठा मामला दर्ज किया गया है। त्यागी के खिलाफ भादवि 323 (मारपीट) धारा 294 (अश्लील हरकतें, गाने), धारा 506 (आपराधिक धमकी) तथा अन्य सम्बद्ध धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
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तिवारी ने कहा कि उनका मुवक्किल 24 जून से कारावास में है तथा कोविड-19 महामारी के चुनौती पूर्ण समय को देखते हुए उसके मामले में सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाना चाहिये।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति पाठक ने त्यागी को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी।
इसके अलावा त्यागी को जमानत पर रिहा करने के लिये निचली अदालत में 50,000 रुपये के निजी मुचलके के साथ एक सॉल्वेंट जमानत देने का भी निर्देश दिया गया।
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