देश की खबरें | अदालत ने अवैध धार्मिक ढांचों के खिलाफ दायर पीआईएल के लिए न्याय मित्र नियुक्त किया

बेंगलुरु, दो फरवरी कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक भूमि पर निर्मित अवैध धार्मिक ढांचों के खिलाफ दायर जनहित याचिका (पीआईएल)के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम हुइलागोल को न्याय मित्र नियुक्त किया है।

मुख्य न्यायाधीश पी बी वराले और न्यायमूर्ति अशोक एस किनागी की खंडपीठ ने बुधवार को पीआईएल पर सुनवाई की। सार्वजनिक भूमि से सभी अनधिकृत धार्मिक ढांचों को हटाने के उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद उच्च न्यायालय ने मामले का संज्ञान लिया है।

राज्य सरकार ने अदालत में एक हलफनामा दाखिल कर कहा है कि अब तक 1,563 अनधिकृत धार्मिक ढांचों को हटाया गया है। अन्य 457 को बरकरार रखा गया और उनमें से 48 को दूसरी जगहों पर ले जाया गया। सिर्फ 17 ढांचों को नियमित किया गया है।

उच्च न्यायालय ने यह उल्लेख किया कि पीआईएल में बड़ी संख्या में अंतरिम अर्जियां दायर की गई हैं और प्रत्येक का अध्ययन करना होगा। अदालत ने न्यायमित्र को अनधिकृत ढांचों की एक नयी सूची तैयार करने को कहा। खंडपीठ ने शुरूआती सूची से राज्य सरकार द्वारा ढांचों को हटाये जाने का संज्ञान लेते हुए यह निर्देश दिया।

अदालत ने राज्य सरकार को न्यायमित्र को सभी संबद्ध दस्तावेज मुहैया करने का निर्देश दिया और विषय को तीन हफ्तों के लिए स्थगित कर दिया।

उल्लेखनीय है कि शीर्ष न्यायालय ने 29 सितंबर 2009 को सार्वजनिक स्थानों से सभी अनधिकृत ढांचे हटाने का निर्देश दिया था।

इसके बाद, उच्च न्यायालय ने पांच सितंबर 2019 को राज्य सरकार को उच्चतम न्यायालय के आदेश पर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार नियमित अंतराल पर अद्यतन रिपोर्ट सौंप रही है।

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