तिरुवनंतपुरम, 27 अप्रैल केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की 11वीं और 12वीं कक्षा की पाठ्यपुस्तकों से कुछ अंश हटाने के फैसले की समीक्षा किए जाने की मांग की है।
राज्य के शिक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लिखे पत्रों में कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बच्चों को पाठ्यक्रमों के जरिए समग्र एवं संतुलित शिक्षा मिले, जो उन्हें जिम्मेदार और भावी नेता बनाने के लिए आवश्यक है।
एनसीईआरटी ने पाठ्यक्रम को युक्तिसंगत करने के नाम पर 12वीं कक्षा की इतिहास की पाठ्यपुस्तक से महात्मा गांधी से संबंधित कुछ अंशों को हाल में हटा दिया था। इस दौरान पाठ्यक्रम से यह हिस्सा भी हटा दिया गया कि कैसे हिंदू-मुस्लिम एकता के गांधी के प्रयासों ने “हिंदू चरमपंथियों को उकसाया”। वह हिस्सा भी हटा दिया गया, जिसमें महात्मा गांधी की हत्या के बाद सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध लगाए जाने का जिक्र था। इन हिस्सों को हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है।
शिवनकुट्टी ने पाठ्यक्रम को युक्तिसंगत करने के नाम पर अहम अध्यायों एवं अंशों को हटाने के एनसीईआरटी के फैसले पर चिंता जताते हुए कहा कि इसकी जल्द से जल्द समीक्षा की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह उल्लेख किया गया है कि नए बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और कोविड-19 के कारण पैदा हुई अप्रत्याशित स्थिति पर आधारित हैं, लेकिन 11वीं और 12वीं कक्षा की पाठ्यपुस्तकों से प्रमुख अध्यायों तथा नौवीं और 10वीं कक्षा से विकास के सिद्धांत को हटाए जाने का फैसला अकादमिक नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि शांति, विकास, जन आंदोलन का उदय और मुगल इतिहास जैसे अहम विषयों को हटाया जाना बच्चों के साथ अन्याय है और यह उनसे सीखने एवं अच्छे नागरिक बनने का अवसर छीनना है।
इससे पहले, शिवनकुट्टी ने संकेत दिया था कि राज्य के स्कूल में उन हिस्सों को भी पढ़ाए जाने की संभावना है जिन्हें पाठ्यपुस्तकों से हटा दिया गया है।
सामान्य शिक्षा विभाग की एक स्वायत्त संस्था राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) इन हटाए गए हिस्सों को राज्य के पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए अपनी पाठ्यक्रम संचालन समिति के निर्णय पर विचार कर रही है।
समिति की बैठक मंगलवार को हुई थी। समिति ने सामान्य शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी को सरकार और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के साथ विचार-विमर्श के बाद इस मामले पर अंतिम निर्णय लेने का जिम्मा सौंपा गया है।
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