नयी दिल्ली, 12 जनवरी केंद्र ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि संविधान में कभी भी केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) के लिए अलग सेवा संवर्ग पर विचार नहीं किया गया है।
केंद्र सरकार ने ऐसे प्रदेशों (यूटी) को भारत संघ का विस्तार करार दिया और कहा कि केंद्र शासित प्रदेशों में काम करने वाले व्यक्ति "केंद्र से संबंधित सेवाओं और पदों" से काम कर रहे हैं।
यह कहते हुए कि राजधानी में सरकार का कामकाज पूरे देश को प्रभावित करता है, केंद्र ने दलील कि 2017 से लेकर आज तक, केवल चार प्रश्न या मुद्दे थे, जहां निर्वाचित सरकार और उपराज्यपाल (एलजी) के बीच मतभेद उत्पन्न हुए, जिन्हें अनुच्छेद 239एए(4) के तहत भारत के राष्ट्रपति के पास भेजा गया था।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ सेवाओं के नियंत्रण पर केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच जारी विवाद पर सुनवाई कर रही है।
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपनी लिखित दलीलों में कहा कि 1992 से 2017 तक ऐसे कई उदाहरण हैं जहां केंद्र सरकार और दिल्ली की सरकार की राजनीतिक विचारधाराएं अलग थीं, लेकिन व्यक्ति और संस्थाओं ने "सहयोग और समन्वय" की भावना से कार्य किया।
मेहता ने कहा, "यह इंगित करना बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है कि संविधान ने कभी भी केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक अलग सेवा संवर्ग पर विचार नहीं किया है। इसका बहुत ही सामान्य कारण है कि एक केंद्र शासित प्रदेश भारत संघ का विस्तार मात्र है और प्रदेशों में काम करने वाले व्यक्ति "केंद्र से संबंधित सेवाओं और पदों" से काम कर रहे हैं।’’
उन्होंने आगे कहा कि विधायी या संवैधानिक शासन में बदलाव के बावजूद राष्ट्रीय राजधानी के शासन पर "विशेष ध्यान" देने की आवश्यकता है और राजधानी को संघवाद के सिद्धांतों को लागू करने वाली भारतीय संघ की एक स्वतंत्र इकाई के साथ बराबरी नहीं की जा सकती है।
लिखित दलीलों के अनुसार, देश की राजधानी में लिया गया कोई भी निर्णय या कोई घटना न केवल देश के बाकी हिस्सों को प्रभावित करती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वैश्विक पटल पर राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को दांव पर लगाने की क्षमता रखती है।
दलीलों में कहा गया है कि 1992 और 2017 के बीच दिल्ली की निर्वाचित सरकार और एलजी के मध्य केवल तीन मतभेद थे, जिन्हें अनुच्छेद 239एए(4) के तहत राष्ट्रपति को संदर्भित करने की आवश्यकता थी।
उन्होंने कहा, ‘‘कानूनी कारणों से इतर अन्य कारणों से हो-हल्ला मचाये जाने के बावजूद, उपराज्यपाल ने राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के रूप में जिम्मेदारी और परिपक्वता की भावना के साथ काम किया है।"
अपने 2018 के फैसले में, पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से माना था कि दिल्ली के एलजी निर्वाचित सरकार की सहायता और सलाह से बंधे हैं, और दोनों को एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।
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