उन्होंने कहा कि ओडिशा के मुख्यमंत्री ने 192 अन्य ऐसे समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के लिए केंद्र को पत्र लिखा था लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला।
उन्होंने कहा ‘‘जनजाति समुदाय के लोग आपस में शादी ब्याह करते हैं, उनकी रिश्तेदारी होती है लेकिन इनमें से एक समुदाय को एक राज्य में अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है और दूसरे में नहीं। इससे बहुत अंतर पड़ता है।’’
अन्नाद्रमुक सदस्य एम थंबीदुरै ने कहा कि सामाजिक न्याय तब ही होता है जब समाज के हर वर्ग के व्यक्ति को बराबरी का दर्जा दिया जाए। उन्होंने कहा कि मछुआरों की अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग पुरानी है। साथ ही वाल्मीक, वडिगा और गुरुबा समुदाय के लोगों को भी उन्होंने अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किए जाने की मांग की।
बहुजन समाज पार्टी के रामजी ने कहा कि अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किए जाने के बाद समुदायों को पढ़ाई और रोजगार में आरक्षण मिलता है और उन्हें इसका लाभ भी होता है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों के, केंद्र सरकार में 75 हजार पद, अनुसूचित जातियों के डेढ़ लाख पद तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के ढाई लाख पद रिक्त हैं जिन्हें तत्काल भरा जाना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि संसद भवन परिसर में बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के आसपास बिखरे कचरे को हटाया जाए।
तमिल मनीला कांग्रेस सदस्य जी के वासन ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि तमिलनाडु के ही वडिगा, कुरमा और अन्य जनजातियों को भी अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया जाना चाहिए तथा इन समुदायों के विकास के लिए कोष भी दिया जाना चाहिए।
झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माझी ने कहा कि वह तमिलनाडु, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश की कुछ जनजातियों को अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने का स्वागत करती हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में अनुसूचित जनजाति के लोगों की संख्या घट रही है क्योंकि बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार ने उनके विकास के लिए सरना धन कोष विधेयक को मंजूरी दी और केंद्र के पास भेजा जिसे अब तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। द्रमुक के मोहम्मद अब्दुल्ला ने कहा कि अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किए जाने के बाद सरकार को चाहिए कि वह इन समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम करे तब ही इनका सशक्तिकरण हो पाएगा।
इसी पार्टी के सदस्य के आर एन राकेश कुमार ने कहा कि तमिलनाडु में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से जनजाति समुदाय के सशक्तिकरण के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि केंद्र को भी इन योजनाओं का अनुकरण करना चाहिए।
भाजपा सदस्य डॉ के लक्ष्मण ने कहा कि यह विधेयक आदिवासी समुदाय के विकास के लिए मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पहले ही आ जाना चाहिए था लेकिन लंबे समय तक देश पर शासन करने वाले दल ने इस बारे में कुछ नहीं सोचा।
तेदेपा सदस्य कनकमेदला रवींद्र कुमार ने कहा कि जनजाति समुदाय के लोगों पर अत्याचार के मामले बढ़े हैं जिन पर रोक लगाने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।
मनीषा अविनाश
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY