बेंगलुरु, 19 जून कर्नाटक में कांग्रेस राज्य की 'अन्न भाग्य' योजना के लिए चावल से 'इनकार' करने पर भाजपा नीत केंद्र सरकार के खिलाफ सभी जिला मुख्यालयों पर मंगलवार को प्रदर्शन करेगी। संबंधित योजना में गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों के प्रत्येक सदस्य को 10 किलोग्राम चावल देने की बात कही गई है।
केंद्र ने हाल में खुला बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत केंद्रीय पूल से राज्य सरकारों को चावल और गेहूं की बिक्री बंद कर दी है।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार, ‘‘राज्य सरकारों के लिए ओएमएसएस (घरेलू) के तहत गेहूं और चावल की बिक्री बंद कर दी गई है।"
इसमें कहा गया कि हालांकि, ओएमएसएस के तहत चावल की बिक्री पूर्वोत्तर राज्यों, पर्वतीय राज्यों और कानून व्यवस्था की स्थिति और प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे राज्यों के लिए 3,400 रुपये प्रति क्विंटल की मौजूदा दर से जारी रहेगी।
यह कदम मानसून की धीमी प्रगति और चावल तथा गेहूं की बढ़ती कीमतों के बीच आया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में मंडी स्तर पर चावल की कीमतों में 10 प्रतिशत तक और पिछले एक महीने में आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी के शिवकुमार ने सोमवार को कहा कि चावल न देकर राज्य को परेशान किए जाने को लेकर केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा।
शिवकुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा, "केंद्र ने हमें परेशान करने का फैसला किया है ताकि हम गरीब लोगों को चावल न दे सकें। हम उन्हें मुफ्त में चावल देने के लिए नहीं कह रहे हैं। शुरू से ही एक व्यवस्था रही है। अगर केंद्रीय गोदामों में चावल है, तो यह मांग करने वालों को दिया जाता है।”
उन्होंने कहा, ‘‘हम कल राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे। हमने अपने नेताओं से भाग लेने के लिए कहा है। मैं बेंगलुरु में भी आंदोलन में हिस्सा लूंगा।’’
इस बीच, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा कि राज्य को अन्न भाग्य योजना के तहत 10 किलोग्राम चावल की अपनी "गारंटी" योजना को पूरा करने के लिए 2.28 लाख मीट्रिक टन चावल की जरूरत है।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "केवल छत्तीसगढ़ ने हमें 1.5 लाख मीट्रिक टन चावल देने की पेशकश की है। पंजाब सहित कहीं भी इतनी बड़ी मात्रा में चावल उपलब्ध नहीं है।"
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार ने नौ जून को भारतीय खाद्य निगम को राज्य की चावल की आवश्यकता के बारे में लिखा था तथा 12 जून को एफसीआई ने यह कहते हुए अनुकूल प्रतिक्रिया दी कि उसके पास कर्नाटक की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त चावल है।
सिद्धरमैया ने आरोप लगाया कि हालांकि, दो दिन बाद एफसीआई ने कर्नाटक के अनुरोध को ठुकरा दिया।
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