देश की खबरें | कई राज्यों में कांग्रेस और अन्य दलों का नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन, नेताओं का चुनौती का ऐलान
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली/लखनऊ/चेन्नई, 28 सितंबर कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने कृषि संबंधी कानूनों के खिलाफ सोमवार को विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन किया और कई नेताओं ने ऐलान किया कि वे इन कानूनों को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देंगे।

कांग्रेस ने शहीद भगत सिंह की जयंती के मौके पर उनके कथनों का उल्लेख करते हुए इन कानूनों का विरोध किया। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और कई अन्य नेताओं ने भगत सिंह के पुश्तैनी गांव खटकड़ कलां में धरना भी दिया।

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अमरिंदर सिंह ने कहा कि उनकी सरकार इन कानूनों के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख करेगी। उन्होंने आगाह किया कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई पंजाब में इन कानूनों के खिलाफ पैदा हुए आक्रोश का फायदा उठा सकती है।

पंजाब में किसानों का ‘रेल रोको’ आंदोलन पांचवें दिन भी जारी रहा और उन्होंने प्रदर्शनों को दो अक्टूबर तक विस्तारित करने की घोषणा की। किसान-मजदूर संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदर्शनकारी 24 सितंबर से जालंधर, अमृतसर, मुकेरियां और फिरोजपुर में रेल पटरियों पर बैठे हैं।

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उत्तर प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना, गुजरात, गोवा, ओडिशा और तमिलनाडु में कांग्रेस एवं विपक्षी दलों ने प्रदर्शन किया।

तमिलनाडु में एमडीएमके प्रमुख वाइको, तमिलनाडु कांग्रेस के अध्यक्ष के एस अलागिरि, द्रमुक नेता टी आर बालू और दयानिधि मारन अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शनों में शामिल हुए।

द्रमुक के मुखिया एमके स्टालिन ने कहा कि उनकी पार्टी इन कानूनों को अदालत में चुनौती देने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा, ‘‘केरल कानूनों के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाने के लिए तैयार है और तमिलनाडु सरकार को भी इस पर अमल करना चाहिए और अगर ऐसा नहीं होता है, तो "हम (द्रमुक) एक विपक्षी दल के रूप में किसानों और जनता की ओर से अदालत जाने के लिए तैयार हैं।’’

केरल के त्रिशूर से कांग्रेस सांसद टी एन प्रतापन ने इन कानूनों में से कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार अधिनियम की संवैधनिक वैधता को चुनौती देते हुए सोमवार को उच्चतम न्यायालय का रुख किया।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी शासित प्रदेशों की सरकारों से कहा कि वे इन कानूनों को निष्प्रभावी करने के मकसद से अपने यहां कानून पारित करने की संभावनाओं पर विचार करें।

पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी बयान के मुताबिक, सोनिया ने कांग्रेस शासित प्रदेशों को सलाह दी है कि वे संविधान के अनुच्छेद 254 (ए) के तहत कानून पारित करने के संदर्भ में गौर करें।

वेणुगोपाल ने कहा कि यह अनुच्छेद इन ‘कृषि विरोधी एवं राज्यों के अधिकार क्षेत्र में दखल देने वाले’ केंद्रीय कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए राज्य विधानसभाओं को कानून पारित करने का अधिकार देता है।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पुडुचेरी में कांग्रेस की सरकारें हैं। महाराष्ट्र और झारखंड में वह गठबंधन सरकार का हिस्सा है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कृषि संबंधी कानूनों को लेकर सोमवार को सरकार पर फिर निशाना साधा और आरोप लगाया कि किसानों की आवाज संसद और बाहर दोनों जगह दबाई गई।

उन्होंने राज्यसभा में इन विधेयकों को पारित किए जाने के दौरान हुए हंगामे से जुड़ी एक खबर साझा करते हुए ट्वीट किया, ‘‘कृषि संबंधी कानून हमारे किसानों के लिए मौत का फरमान हैं। उनकी आवाज संसद और बाहर दोनों जगह दबाई गई। यहां इस बात का सबूत है कि भारत में लोकतंत्र खत्म हो गया है।’’

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने कहा, ‘‘शहीद भगत सिंह ने कहा था कि शोषण करने वाली व्यवस्था पूंजीपतियों के फायदे के लिए किसानों-मजदूरों का हक छीनती है। भाजपा सरकार अपने खरबपति मित्रों के लिए किसानों की एमएसपी का हक छीनकर उन्हें बंधुआ खेती में धकेल रही है। किसान विरोधी बिलों के खिलाफ संघर्ष ही भगत सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि है।’’

दिल्ली में भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने इन कानूनों का विरोध करते हुए इंडिया गेट के निकट एक ट्रैक्टर को आग के हवाले कर दिया। इस मामले में संगठन के पांच कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

संगठन ने ट्वीट किया, ‘‘भगत सिंह की जयंती पर युवा कांग्रेस ने किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ ट्रैक्टर में आग लगाई।’’

देश के कई अन्य राज्यों में भी कांग्रेस के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने इन कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन किया।

सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कांग्रेस किसानों के नाम पर राजनीति करने की कोशिश कर रही है और उसका सच सामने आ गया है।

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