नयी दिल्ली, 22 जुलाई संसद की एक समिति ने देश के प्रतिस्पर्धा कानून को बेहतर बनाने की जरूरत बताते हुए सिफारिश की है कि सरकार को एक निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी डिजिटल तंत्र बनाने के लिए डिजिटल प्रतिस्पर्धा अधिनियम पर विचार करना चाहिए और उसे लागू करना चाहिए।
वित्त संबंधी स्थायी समिति ने ‘बिग टेक कंपनियों द्वारा प्रतिस्पर्धा रोधी व्यवहार’ पर बृहस्पतिवार को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा कि उसे लगता है कि डिजिटल बाजारों में प्रतिस्पर्धा रोधी व्यवहार को नियंत्रित करने की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत के प्रतिस्पर्धा कानून को बेहतर किया जाना चाहिए और इसलिए, नई जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को मजबूत करना जरूरी है।
समिति ने सुझाव दिया कि आयोग के भीतर एक डिजिटल मार्केट इकाई स्थापित की जाए, जिसमें कुशल विशेषज्ञ, शिक्षाविद और वकील हों ताकि ‘प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण डिजिटल मध्यवर्ती’ (एसआईडीआई) और उभरते एसआईडीआई की निगरानी कर सकें, केंद्र सरकार को इन्हें नामित करने के बारे में सिफारिशें दे सकें।
समिति ने कहा कि डिजिटल बाजारों की अनूठी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारत को अपने प्रतिस्पर्धा कानून को बेहतर करने की जरूरत है।
रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने सिफारिश की कि सरकार को एक निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी डिजिटल तंत्र बनाने के लिए डिजिटल प्रतिस्पर्धा अधिनियम पर विचार करना चाहिए और उसे लागू करना चाहिए, जो न केवल हमारे देश और इसकी प्रारंभिक स्टार्ट-आप व्यवस्था के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए वरदान साबित होगा।
भारतीय जनता पार्टी के सांसद जयंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली समिति ने यह भी कहा कि एक एसआईडीआई को ऑनलाइन विज्ञापन सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से, तृतीय पक्ष सेवाओं का उपयोग करने वाले अंतिम उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत आंकड़ों का प्रसंस्करण नहीं करना चाहिए जो संबंधित प्लेटफॉर्म की प्रमुख सेवाओं का उपयोग करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार समिति इस बात को समझती है कि प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्मों के विशिष्ट गठजोड़ बाजारों को बंद कर सकते हैं और प्रतिस्पर्धा को कम कर सकते हैं और अंतत: अंतिम उपयोगकर्ता के लिए मूल्य बढ़ा सकते हैं।
उसने सिफारिश की कि एसआईडीआई को व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं को तृतीय पक्ष ऑनलाइन मध्यस्थता सेवाओं के माध्यम से या अपने स्वयं के प्रत्यक्ष ऑनलाइन बिक्री चैनल के माध्यम से उन कीमतों या शर्तों पर समान उत्पादों या सेवाओं की पेशकश करने से नहीं रोकना चाहिए जो संबंधित प्लेटफॉर्म की ऑनलाइन मध्यस्थता सेवाओं के माध्यम से पेश की जाने वाली कीमतों से अलग हैं।
समिति ने यह भी कहा कि जब छूट कुछ उत्पाद श्रेणियों में कीमतों को लागत स्तर से नीचे धकेलती है तो बाजार शक्ति वाले प्लेटफॉर्मों द्वारा गहन मूल्य छूट एक चिंता का विषय है जिससे ऑफलाइन और ऑनलाइन रिटेलर की प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता प्रभावित होती है।
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