नयी दिल्ली, 21 दिसंबर संसद की एक समिति ने विदेश मंत्रालय से कहा है कि वह विभिन्न देशों के पास लंबित सभी प्रत्यर्पण और परस्पर विधिक सहयोग संबंधी अनुरोधों के मामलों पर संज्ञान ले और इसके कारणों की जांच के लिए एक कार्य बल गठित करे।
संसद में बुधवार को पेश ‘विदेशों के साथ प्रत्यर्पण संधियों, शरण संबंधी मुद्दों, अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा और वित्तीय अपराधों के मुद्दों सहित भारत और अंतरराष्ट्रीय कानून’ विषय पर विदेश मामलों संबंधी स्थायी समिति के नौंवे प्रतिवेदन की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
भारतीय जनता पार्टी सांसद पी पी चौधरी की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि भारत दीवानी अथवा वाणिज्यिक मामलों में न्यायिक और न्यायेतर दस्तावेजों पर हेग सम्मेलन में हुए समझौते का हस्ताक्षरकर्ता है।
समिति ने कहा कि दीवानी अथवा वाणिज्यिक मामलों में विदेश में साक्ष्य लेने संबंधी हेग संधि को वर्ष 2007 में भी इस विश्वास के तहत अंगीकार किया गया था कि अनुरोध पत्र की तुलना में विधिक दस्तावेजों की सुपुर्दगी की प्रक्रिया तेज हो जायेगी।
इसमें यह भी विचार किया गया था कि भारत ने 40 देशों के साथ पारस्परिक कानूनी सहायता संधियों पर भी हस्ताक्षर किये हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘ समिति इसे निराशाजनक पाती है कि उपरोक्त बातों के बावजूद विभिन्न देशों के साथ 845 परस्पर विधिक सहयोग संधि (एमएलएटी) अनुरोध लंबित हैं जिनमें अनुरोध पत्र और पारस्परिक कानूनी सहायता अनुरोध शामिल हैं।’’
इसमें कहा गया है कि समिति का यह निष्कर्ष है कि ऐसे अनुरोधों पर कार्रवाई करने में संबंधित देशों से वांछित सहयोग प्रतीक्षित है, इसलिये समिति इच्छा व्यक्त करती है कि विदेश मंत्रालय अनुरोधों की भारी मात्रा में लंबित मामलों पर गंभीरता से संज्ञान ले और इसके कारणों की जांच के लिये एक कार्य बल गठित करे।
समिति ने मंत्रालय से कहा कि वह विभिन्न देशों के पास लंबित सभी प्रत्यर्पण और परस्पर विधिक सहयोग संबंधी अनुरोधों को लेकर उपाय करे।
संसदीय समिति ने यह भी कहा कि इस संबंध में महत्वपूर्ण देशों के साथ प्राथमिकता के आधार पर अधिक से अधिक परस्पर विधिक सहयोग संधि पर हस्ताक्षर किये जाएं।
समिति ने इस संबंध में सरकार के उत्तर को अस्वीकार कर दिया।
विदेश मंत्रालय ने संसदीय समिति को अपने उत्तर में बताया कि विभिन्न देशों के साथ आतंकवाद पर संयुक्त कार्य समूह की बैठकों के दौरान लंबित प्रत्यर्पण मामलों और उस देश से संबंधित आतंकवाद विरोधी मामलों पर एमएलएटी अनुरोधों पर लंबित मामलों में तेजी लाने के लिये चर्चा की जाती है। उसने उत्तर में कहा कि मिशन नियमित रूप से संबंधित देशों के साथ लंबित अनुरोधों का अनुसरण कर रहे हैं।
मंत्रालय ने कहा कि विदेशों में भारतीय मिशन भारत के एमएलएटी अनुरोधों के शीघ्र निष्पादन के लिये संबंधित देशों के साथ सक्रिय रूप से समन्वय करते हैं।
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