नयी दिल्ली, 15 मई राष्ट्रीय राजधानी की एक निचली अदालत ने दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा को निर्देश दिया है कि वह दुर्घटना-संभावित स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए नागरिक एजेंसी के साथ बैठक करें और उन स्थानों पर आधुनिक कैमरे लगाने के लिए ‘गंभीर प्रयास’ करें।
अदालत ने दिल्ली के शीर्ष पुलिस अधिकारी से उन सड़क दुर्घटनाओं की पृष्ठभूमि में यातायात प्रबंधन पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी, जिसके परिणामस्वरूप लोगों की जान गईं और चोटें आईं।
अदालत ने राष्टीय राजमार्ग (एनएच)-आठ, रिंग रोड और धौला कुआं सहित विभिन्न दुर्घटना-संभावित क्षेत्रों का संज्ञान लिया है।
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की पीठासीन अधिकारी शेफाली बरनाला टंडन एक निरीक्षक विपिन कुमार की उस अर्जी पर सुनवाई कर रही थीं, जिसमें एनएच-आठ, रिंग रोड और धौला कुआं में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए नागरिक एजेंसी को निर्देश देने की मांग की गई थी।
टंडन ने आठ मई को दिये अपने आदेश में कहा, ‘‘...पुलिस आयुक्त, दिल्ली को एनएच-आठ, रिंग रोड, धौला कुआं आदि स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए नागरिक एजेंसी यानी एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण), पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग), दिल्ली छावनी बोर्ड आदि के साथ बैठक करने और उपरोक्त स्थानों पर जल्द से जल्द अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए ईमानदार प्रयास के निर्देश दिये जाते हैं, ताकि दुर्घटना के अधिकांश मामलों को सुलझाया जा सके।’’
न्यायाधीश ने कहा कि अर्जी के अनुसार, एनएच-आठ, रिंग रोड और धौला कुआं लूप दुर्घटना-संभावित क्षेत्र हैं और उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरों की अनुपस्थिति में, दुर्घटना के अधिकांश मामले अनसुलझे रह जाते हैं।
उन्होंने अर्जी का संज्ञान लेते हुए कहा कि 2022 में घातक दुर्घटना के 35 मामलों में से 21 अनसुलझे रहे।
न्यायाधीश ने कहा कि मोटर वाहन संशोधन अधिनियम, 2019, एक परोपकारी कानून है, जिसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में मृतक के परिवार और स्थायी विकलांगता सहित घायल लोगों को मुआवजा देना है।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हालांकि, यह दुखद है कि प्रौद्योगिकी के इस युग में भी सड़क दुर्घटना के अधिकांश मामले अनसुलझे रहते हैं और पीड़ित न्याय से वंचित।’’
अदालत ने आयुक्त को आठ जून को सुनवाई की अगली तारीख को या उससे पहले, बैठक के नतीजे के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया।
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