नयी दिल्ली, एक जुलाई व्यापारियों का संगठन कैट ने बृहस्पतिवार को कहा कि एक अच्छी और सरल कर व्यवस्था की घोषित भावना के विपरीत जीएसटी औपनिवेशिक कराधान प्रणाली बन गया है और यह देश में कंपनियों की जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता।
कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने एक बयान में कहा कि पिछले कुछ समय में जीएसटी में कई संशोधन किये गये और नियम लाये गये। इससे अप्रत्यक्ष कर प्रणाली अधिक जटिल बन गयी है और व्यापारियों पर इसका बोझ पड़ रहा है।
कैट के अनुसार जीएसटी (माल एवं सेवा कर) कराधान प्रणाली को विकृत करने और उसमें असमानताओं तथा विसंगतियां लाने के लिए केवल केंद्र ही नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर राज्य सरकारें भी जिम्मेदार हैं, जिसने इसे और अधिक जटिल प्रणाली और व्यापारियों के लिए ‘बड़ा सिरदर्द’ बना दिया है।
जीएसटी लागू होने के चार साल पूरा होने पर व्यापारियों के संगठन ने कहा कि एक अच्छी और सरल कर व्यवस्था की घोषित भावना के विपरीत जीएसटी औपनिवेशिक कराधान प्रणाली बन गया है और यह देश में कंपनियों की जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता।
कैट के अनुसार जीएसटी लागू हुए, चार साल हो गये, लेकिन पोर्टल पर अभी भी कई समस्याएं बनी हुई है।
संगठन के अनुसार, ‘‘हम वित्त मंत्री के साथ बातचीत के जरिये इसकी प्रमुख समस्याओं को सुलझाये जाने की उम्मीद करते हैं।’’
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