विदेश की खबरें | कोलंबो बंदरगाह के कर्मियों ने ‘भारतीय दबाव’ का आरोप लगाया

कोलंबो, दो जुलाई कोलंबो बंदरगाह के श्रमिकों ने इस व्यस्ततम बंदरगाह के ‘‘कंटेनर टर्मिनल’’ को विकसित करने से रोकने के लिए कथित "भारतीय दबाव" के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की बृहस्पतिवार को धमकी दी।

इससे पहले प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने संवाददाताओं से कहा था कि ‘ईस्टर्न कंटेनर टर्मिनल’ (ईसीटी) को भारत को सौंपने के बारे में अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

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उनकी इस टिप्पणी के एक दिन बाद हड़ताल की घोषणा की गयी है।

राजपक्षे ने कहा, "यह भारत के साथ पिछली सरकार द्वारा हस्ताक्षरित एक राजनयिक समझौता था, राष्ट्रपति सिरिसेना और प्रधानमंत्री (नरेंद्र) मोदी के बीच समझौता।"

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पिछली सरकार ने ईसीटी को विकसित करने के लिए त्रिपक्षीय प्रयास के तहत भारत और जापान के साथ "सहयोग ज्ञापन" (एमओसी) पर हस्ताक्षर किए थे। ईसीटी 50 करोड़ अमेरिकी डालर के चीन संचालित कोलंबो इंटरनेशनल कंटेनर टर्मिनल के पास स्थित है।

एमओसी पिछले साल पूरा हो गया था लेकिन टर्मिनल विकास के लिए औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर होना बाकी है। श्रमिकों के विभिन्न संगठन सरकार पर एमओसी को छोड़ने और टर्मिनल को 100 प्रतिशत श्रीलंकाई उद्यम के रूप में विकसित करने के लिए दबाव डाल रहे हैं।

एक श्रमिक संगठन नेता प्रसन्ना कलुथरेगे ने कहा, "जब तक मामला सुलझ नहीं जाता, हम अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे।"

श्रमिक संगठन श्रीलंका को खुद ईसीटी विकसित करने से रोकने के लिए कथित “भारतीय दबाव” का विरोध कर रहे हैं।

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