दुबई, 20 जून भारत में कोयला, पेट्रोल जैसे जीवाश्म ईंधन की खपत वर्ष 2023 में आठ प्रतिशत बढ़ी है। कुल ईंधन खपत में देखा जाए तो जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी 89 प्रतिशत रही है। एनर्जी इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार भारत में यूरोप और उत्तरी अमेरिका में कुल उपयोग से अधिक कोयले का उपयोग किया गया।
एनर्जी इंस्टीट्यूट और केपीएमजी और कियर्नी के सह-लेखकों ने बृहस्पतिवार को विश्व ऊर्जा की सांख्यिकीय समीक्षा का 73वां वार्षिक संस्करण जारी किया। इसमें पहली बार वर्ष 2023 के लिए पूर्ण वैश्विक ऊर्जा आंकड़े प्रस्तुत किये गये।
रिपोर्ट के आंकड़ों से पांच प्रमुख बातें उभर कर सामने आती हैं। इसकी शुरुआत रिकॉर्ड वैश्विक ऊर्जा खपत से होती है, जिसमें कोयला और तेल जीवाश्म ईंधन और उनके उत्सर्जन को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सौर और पवन ऊर्जा ने वैश्विक नवीकरणीय बिजली उत्पादन को एक और रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया। पनबिजली को छोड़कर नवीकरणीय उत्पादन 13 प्रतिशत बढ़कर 4,748 टीडब्ल्यूएच (टेरावाट आवर) के रिकॉर्ड वैश्विक उच्चस्तर पर पहुंच गया।
यह वृद्धि लगभग पूरी तरह से पवन और सौर ऊर्जा द्वारा संचालित थी और उत्पादित कुल शुद्ध अतिरिक्त बिजली का 74 प्रतिशत हिस्सा थी।
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