बीजिंग, पांच दिसंबर चीन इस सप्ताह हिंद महासागर क्षेत्र फोरम का दूसरा सम्मेलन आयोजित करेगा, जो भारत के करीब रणनीतिक जल क्षेत्र में अपने प्रभाव को मजबूत करने के प्रयास में क्षेत्र के कई देशों को एक साथ लाने की पहल है।
पिछले साल चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व समूह का एक संगठन, चीन अंतरराष्ट्रीय विकास सहयोग एजेंसी (सीआईडीसीए) ने दक्षिण-पश्चिम चीन में युन्नान प्रांत की राजधानी कुनमिंग में विकास सहयोग पर चीन-हिंद महासागर क्षेत्र फोरम (सीआईओआरएफडीसी) की एक बैठक आयोजित की थी।
सीआईडीसीए का नेतृत्व पूर्व उप विदेश मंत्री और भारत में राजदूत रहे लुओ झाओहुई कर रहे हैं।
सीआईडीसीए ने दावा किया कि सम्मेलन में इंडोनेशिया, पाकिस्तान, म्यांमा, श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव, नेपाल, अफगानिस्तान, ईरान, ओमान, दक्षिण अफ्रीका, केन्या, मोजाम्बिक, तंजानिया, सेशेल्स, मेडागास्कर, मॉरीशस, जिबूती, ऑस्ट्रेलिया सहित 19 देश हिस्सा लेंगे।
ऑस्ट्रेलिया और मालदीव ने बाद में अपनी भागीदारी से इनकार कर दिया। बैठक में भारत को आमंत्रित नहीं किया गया।
चीनी मंच का उद्देश्य स्पष्ट रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के मजबूत प्रभाव का मुकाबला करना है, जहां हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए) जैसे भारत समर्थित संगठन ने मजबूत जड़ें जमा ली हैं। आईओआरए में 23 देश शामिल हैं। 1997 में गठित आईओआरए में चीन एक संवाद भागीदार है।
आईओआरए के अलावा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिंद महासागर क्षेत्र के तटीय देशों के बीच सक्रिय सहयोग के लिए 2015 में ‘‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास’’ (सागर) का प्रस्ताव रखा।
भारतीय नौसेना समर्थित ‘हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी’ (आईओएनएस) क्षेत्र की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग बढ़ाना चाहता है।
मालदीव के राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि उपराष्ट्रपति हुसैन मोहम्मद लतीफ ‘चीन-हिंद महासागर क्षेत्र विकास सहयोग फोरम’ में हिस्सा लेंगे और चीनी अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे।
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