रायपुर, 15 जनवरी कभी हाथ में राइफल थामे रहने वाले करण हेमला अब कलम पकड़ कर बेहतर भविष्य की उम्मीद में छत्तीसगढ़ में 10वीं की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
वर्ष 2005 के दौरान बस्तर संभाग में नक्सल विरोधी आंदोलन ‘सलवा जुडूम’ की शुरुआत के साथ शुरू हुई हिंसा के बाद 26 वर्षीय हेमला को पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। कभी नक्सली रहे हेमला आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
हेमला अब फिर से पढ़ाई शुरू करने और साक्षर बनने के अपने सपने को पूरा करने का अवसर पाकर रोमांचित हैं।
हेमला उन छह नक्सिलयों - तीन पुरुष और तीन महिलाएं - में शामिल हैं जिन्होंने कबीरधाम जिले के कवर्धा शहर में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था।
जिला पुलिस के इन्हें शिक्षित करने के अभियान के तहत आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों ने राज्य मुक्त विद्यालय की 10वीं कक्षा की परीक्षा के लिए फॉर्म भरे हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली, जिनमें दो दंपति भी शामिल हैं, कबीरधाम जिले में छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश सीमा से सटे जंगलों में सक्रिय थे और 2019 तथा 2021 में इनका पुलिस से आमना-सामना हुआ था।
नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के काकेकोरमा गांव के मूल निवासी हेमला 2005 में एक स्कूल में सातवीं कक्षा के छात्र थे।
हेमला ने पीटीआई- से कहा, ‘‘बस्तर संभाग के अंदरूनी इलाकों में कई स्कूल बंद हो गए और छात्रों को डर के चलते पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।’’
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