भोपाल, छह अगस्त मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह द्वारा मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग देने के मामले में प्रधानमंत्री को लिखे गये पत्र के लिए उनकी आलोचना करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया है।
अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री मंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर पंजाब व अन्य राज्यों के हित में मध्यप्रदेश को बासमती चावल की जीआई टैगिंग की अनुमति नहीं देने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री चौहान ने इस संबंध में बृहस्पतिवार को ट्वीट किया, ‘‘ मैं पंजाब की कांग्रेस सरकार द्वारा मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैगिंग देने के मामले में प्रधानमंत्री जी को लिखे पत्र की निंदा करता हूं और इसे राजनीति से प्रेरित मानता हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से यह पूछना चाहता हूँ कि आखिर उनकी मध्यप्रदेश के किसान बंधुओं से क्या दुश्मनी है? यह मध्यप्रदेश या पंजाब का मामला नहीं, पूरे देश के किसान और उनकी आजीविका का विषय है।’’
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पंजाब के अलावा हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कुछ जिलों को बासमती के लिये पहले से ही जी आई टैग प्राप्त है। मध्यप्रदेश ने बासमती के जीआई टैगिंग के लिये अपने 13 जिलों को शामिल करने की मांग की है।
पंजाब के मुख्यमंत्री ने पत्र में प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि वह इस मामले में संबंधित अधिकारियों को यथास्थिति न बदलने का निर्देश दें। यह भारत के किसानों और बासमती निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिये जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि पंजीकरण के कमजोर होने से पाकिस्तान को मदद मिल सकती है क्योंकि वह भी जी आई टैग के अनुसार बासमती का उत्पादन करता है।
पंजाब के मुख्यमंत्री की तर्क को काटते हुए चौहान ने कहा, ‘‘पाकिस्तान के साथ कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीइडीए) के मामले का मध्यप्रदेश के दावों से कोई संबंध नहीं है क्योंकि यह भारत के जी आई कानून के तहत आता है और इसका बासमती चावल के अंतर्देशीय दावों से इसका कोई जुड़ाव नहीं है।’’
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मध्यप्रदेश को मिलने वाले जी आई टैगिंग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत के बासमती चावल की कीमतों को स्थिरता मिलेगी और देश के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मध्यप्रदेश के 13 जिलों में वर्ष 1908 से बासमती चावल का उत्पादन हो रहा है, इसका लिखित इतिहास भी है। सिंधिया रियासत के रिकॉर्ड में अंकित है कि वर्ष 1944 में प्रदेश के किसानों को बीज की आपूर्ति की गई थी। भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद ने अपनी उत्पादन उन्मुख सर्वेक्षण रिपोर्ट' में दर्ज किया है कि मध्यप्रदेश में पिछले 25 वर्ष से बासमती चावल का उत्पादन किया जा रहा है।’’
चौहान ने कहा कि पंजाब और हरियाणा के बासमती निर्यातक मध्यप्रदेश से बासमती चावल खरीद रहे हैं। भारत सरकार के निर्यात के आँकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं। भारत सरकार वर्ष 1999 से मध्यप्रदेश को बासमती चावल के ब्रीडर बीज की आपूर्ति कर रही है।
जून माह में मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा था कि मध्यप्रदेश के बासमती उत्पादक इलाकों को जी आई टैग नहीं देने के मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिये मध्यप्रदेश सरकार उच्चतम न्यायालय का रुख करेगी।
पटेल ने कहा कि वे पंजाब के मुख्यमंत्री के इस कदम की निंदा करते हैं वहीं प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस किसान विरोधी है और इसलिये पंजाब सरकार मध्यप्रदेश के दावे का विरोध कर रही है।
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