नयी दिल्ली, 13 दिसम्बर सरकार ने बुधवार को लोकसभा को अवगत कराया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत लाभार्थियों को सी-फूड देने की कोई योजना नहीं है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल ने प्रश्नकाल के दौरान वाईएसआर कांग्रेस के श्रीकृष्ण देवरायालू लावू के एक पूरक प्रश्न के उत्तर में यह बात कही।
गोयल ने कहा कि केंद्र सरकार देश में 81 करोड़ लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराती है और गरीबों के लाभ के लिए दो लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर रही है, ऐसे में राज्य सरकारों को भी कुछ करने की इच्छा है तो वह अलग से जोड़ सकती हैं।
उन्होंने आगे कहा, ‘‘यदि राज्य सरकार गेहूं, चावल के बदले मोटा अनाज देना चाहे तो दे सकती है। राज्य सरकार भारतीय खाद्य निगम को आदेश देकर मोटा अनाज खरीदवाए और उसे गेहूं, चावल के बदले दे।’’
गोयल ने कहा, ‘‘अन्य पदार्थ को जोड़ने का कोई प्रस्ताव केंद्र सरकार के सामने नहीं है और गरीबों के खाद्यान्न की जरूरतें पूरी की जा रही हैं। (हमें) संतुष्टि है कि आज देश में भुखमरी के कारण किसी की जान नहीं जा रही है।’’
पीडीएस में सी-फूड शामिल करने की नीति आयोग की सिफारिश पर अमल को लेकर पूछे गये प्रश्न के उत्तर में गोयल ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि सदस्य को अच्छा नहीं लगता कि गेहूं चावल दिया जा रहा है। नीति आयोग का काम नयी-नयी चीजों का गहराई से अध्ययन करना और अपने विचार रखना है। ऐसे कई विचार आयोग राज्य सरकारों के लिए भी रखता है। उस पर उपयुक्त विचार करके केंद्र सरकार उस पर निर्णय लेती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पहले के जमाने में हर राज्य को तत्कालीन योजना आयोग का दरवाजा खटखटाना होता था। हर योजना के लिए तत्कालीन योजना आयोग के पास जाना होता था। अब पहले का जमाना खत्म हो गया। राज्य सरकार पूरी तरह स्वेच्छा से काम कर सकती है तथा अपने बजट को अपने हिसाब से खर्च कर सकती है। अब योजना आयोग का नियंत्रण खत्म हो गया है। नीति आयोग की सिफारिश को सुझाव की तरह लिया जाना चाहिए, न कि आदेश के तौर पर।’’
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