देश की खबरें | गिरफ्तारी की शक्ति से जुड़े पीएमएलए के प्रावधान का केंद्र ने उच्चतम न्यायालय में बचाव किया

नयी दिल्ली, आठ मार्च केंद्र ने गिरफ्तार करने की शक्ति से जुड़े धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधान का मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में बचाव किया। साथ ही, कहा कि इसमें पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की गई है तथा गिरफ्तारी के लिए आधार और निष्कर्ष पर पहुंचाने वाली सामग्री सहित संबद्ध रिकार्ड अदालत के समक्ष रखे जाते हैं, ताकि वह इनका अवलोकन कर सके।

पीएमएलए के कुछ प्रावधानों की व्याख्या से जुड़ी याचिकाओं के एक समूह पर दलीलें सुन रही शीर्ष न्यायालय से सरकार ने कहा कि संबद्ध अदालत से कुछ भी गोपनीय नहीं रखा गया है।

न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की पीठ से केन्द्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोई भी प्रावधान महज इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता कि यह आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) से अलग जाता है।

मेहता ने पीठ से कहा, ‘‘कृपया देखिये कि धारा 19 (पीएमएलए की) में कितनी संख्या में सुरक्षा मुहैया की गई है।’’

पीएमएलए की धारा 19 गिरफ्तार करने की शक्तियों से संबद्ध है।

सॉलिसीटर जनरल ने पीठ से कहा कि पीएमएलए की धारा 19 की वैधता को विषय में इस आधार पर चुनौती दी गई है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) और अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा) का कथित तौर पर उल्लंघन करता है।

धारा 19 का जिक्र करते हुए मेहता ने कहा कि सिर्फ उच्च अधिकारी को ही गिरफ्तार करने की शक्ति प्राप्त है और हर गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के अंदर अदालत में पेश करना होगा।

पीठ ने कहा, ‘‘हिरासत में पूछताछ से आपको चाहे जो कुछ भी सूचना मिल जाए लेकिन गिरफ्तारी का पूरा उद्देश्य अवैध होगा।’’

मेहता ने कहा कि गिरफ्तारी के लिए विस्तृत तर्क भी न्यायलय के समक्ष रखे गए हैं।

इस मामले में बुधवार को भी बहस जारी रहेगी।

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